मनवा हरसे/ शीला मिश्रा
बाग-बगीचा सब है हरसे।
झूम- झूमकर मेघा बरसे।।
सूनी सूनी काली रतियाँ।
बरसन रहतीं मोरी अँखियाँ।।
कँगना चूड़ी रूठीं मुझसे ।
झूम- झूमकर मेघा बरसे।।
बहुत सताये तेरी सुधियाँ
मीठी मीठी प्यारी बतियाँ।।
आँखों का कजरा है तरसे
झूम- झूमकर मेघा बरसे।।
महके महके फूल व कलियाँ।
झूला झूलें मेरी सखियाँ।।
वन उपवन कैसे हैं हरसे।
झूम- झूमकर मेघा बरसे।।
सखियाँ पहनें लहंगा चनियाँ।
चूड़ी से सजाई कलइयाँ।।
सजने को आतुर हूँ कबसे।
झूम- झूमकर मेघा बरसे।।
सखियाँ खींचें मेरी बहियाँ।
तेरे बिन ना भाये सइयाँ।।
आ जाओ तो मनवा हरसे
झूम- झूमकर मेघा बरसे।।
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सावन का बहुत मीठा गीत। गीत में मधुरता और लय गुथी हुई है
ReplyDelete। सार्थक सृजन के लिए हार्दिक बधाई शीला मिश्रा जी।
.. विभा रश्मि
हार्दिक आभार,
Deleteशीला मिश्रा
प्यारी कविता-रीता प्रसाद
ReplyDeleteहार्दिक आभार
Deleteशीला मिश्रा
बाग-बगीचा सब है हरसे।
ReplyDeleteझूम- झूमकर मेघा बरसे।।बहुत सुंदर कविता । हार्दिक बधाई। सुदर्शन रत्नाकर
हार्दिक आभार
Deleteशीला मिश्रा
सुंदर सावनी गीत!
ReplyDelete~सादर
अनिता ललित