दिल खुश है अकेला / डॉ.वन्दना शर्मा
दिल खुश है अकेला
नहीं चाहिए कोई झमेला
जिन्हें कद्र नहीं हमारी
उनसे दूरी ही अच्छी
जो सुनना नहीं चाहते
उनके लिए चुप्पी ही अच्छी
व्यर्थ ऐसे रिश्तो के लिए
अपने शब्द, भाव देना
अपनी डायरी, कलम
ही
होती सबसे अच्छी
ये नदिया, भी तो
बहती चुपचाप मस्त
पहाड़ भी रहते तने
रहते शांत खड़े
फूल भी देखो खिलते हैं
बिना किसी उम्मीद के
जिंदगी भले छोटी हो
जिंदगानी बड़ी जाएगी
कोई पढ़े ना पढ़े
कहानी लिखी जाएगी
बात निकली है तो
कहीं तो जरूर जाएगी