पथ के साथी
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Monday, March 19, 2012
Tuesday, May 17, 2011
उजाले की किरनें
शब्दों के उजाले की किरनें धरती पर जगाई थी ॥
इस दुनिया ने था जाना उसे हर-दीप के नाम से ।
हमने तो उसमें सगी बहन की पाक सूरत पाई थी ॥
आज के दिन कहता है दिल -तू ऐसा उजाला बने ।
रौशन हो सारा यह जग ,रोज हर पल दिवाली मने॥ आज डॉ हरदीप कौर सन्धु का जन्म दिन है ।इस अवसर पर इनका पंजाबी ब्लॉग http://punjabivehda.wordpress.com/2011/05/17/ਧੀਆਂ-ਧਿਆਣ
असीम शुभ कामनाओं के साथ
काम्बोज
Thursday, April 21, 2011
है हमारी कामना !
रामेश्वर काम्बोज’हिमांशु’
है हमारी कामना
यही पावन भावना ।
दु:ख कभी न पास आएँ
अधर सदा मुसकुराएँ
खिल जाएँ सभी कलियाँ
महक उठे मन की गलियाँ
हृदय जब हो जाए दुर्बल
बन जाना तू ही सम्बल
हाथ आकर थामना
है हमारी कामना ।
कौन अपना या पराया
मन कभी न जान पाया
यह मेरा वह भी मेरा
साँझ अपनी व सवेरा
बाँट दो दुख कम कर लो
सुख द्वारे पर यूँ धर लो
सुखों से हो सामना
है हमारी कामना ।
-0-
Saturday, March 19, 2011
जन्मदिन की शुभकामनाएँ
क्या हुआ 'गर काम -काज में उलझे
जब भी यह दिन डाले फेरा
महक उठे घर -आँगन तेरा
कोई तो जन्म दिन मनाए मेरा
जी तो चाहता ही होगा आज तेरा
आओ मिलकर हम आज सारे
बिन मोमबत्तियों को फूंक मारे
बिन केक और बिन गुब्बारे
मिल बैठकर कुछ बात चलाएँ
और आपका जन्म दिन मनाएँ !
मिल बैठकर कुछ बात चलाएँ
और आपका जन्म दिन मनाएँ !
हरदीप कौर सन्धु (बरनाला)
Monday, March 1, 2010
तीन वर्ष पूरे
प्रिय हिमांशु भाई,
होली की शुभकामनाओं के साथ लेखनी का होली -विशेषांक भेज रही हूँ, उम्मीद है पसंद आएगा।
यहाँ इंगलैंड में भले ही अभी पातहीन वृक्षों पर कोपलें न फूटी हों, परन्तु चिड़ियों ने घोसले बनाने शुरु कर दिए हैं। सृजन और संरक्षण की इस एक और नई नवेली ऋतु में...बाहर बर्फ़ हो या बासंती बयार, आइये लेखनी के इन पन्नों पर हम आप खेलते हैं फाग। मनाते हैं एक बार फिरसे वही रूप और रंग का महोत्सव...रंग और रूप जिसके बिना व्यंजन ही नहीं, जीवन भी स्वादहीन है...जिसके हम-आप, हमारी संस्कृति और सभ्यता, सभी चिर दीवाने-से दिखते है।
यह भी एक सुखद संयोग की ही बात है कि लेखनी का यह अंक ठीक होली के दिन ही आपतक पहुँच रहा है, होली की उल्लास भरी शुभकामनाएँ तो हैं ही, यह भी याद दिलाना चाहूँगी कि प्रयास और खोज के नए-नए पड़ाव पार करती आपकी लेखनी इस अंक के साथ अपनी सृजन-यात्रा के तीन वर्ष पूरे कर, चौथे वर्ष में प्रवेश कर रही है। आइये इसकी खुशियों में शामिल होते हैं। यह पर्व भी तो किसी उल्लास, किसी महोत्सव से कम नहीं..इसे अपना प्यार, अपनी शुभकामनाएं नहीं देंगे क्या …!
होली की शुभकामनाओं के साथ लेखनी का होली -विशेषांक भेज रही हूँ, उम्मीद है पसंद आएगा।
यहाँ इंगलैंड में भले ही अभी पातहीन वृक्षों पर कोपलें न फूटी हों, परन्तु चिड़ियों ने घोसले बनाने शुरु कर दिए हैं। सृजन और संरक्षण की इस एक और नई नवेली ऋतु में...बाहर बर्फ़ हो या बासंती बयार, आइये लेखनी के इन पन्नों पर हम आप खेलते हैं फाग। मनाते हैं एक बार फिरसे वही रूप और रंग का महोत्सव...रंग और रूप जिसके बिना व्यंजन ही नहीं, जीवन भी स्वादहीन है...जिसके हम-आप, हमारी संस्कृति और सभ्यता, सभी चिर दीवाने-से दिखते है।
pls, visit www.lekhni.net
पुनः रंगपर्व होली की इन्द्रधनुषी शुभकामनाएँ!!
Wednesday, October 28, 2009
विजया दशमी मंगलमय हो !
विजया दशमी मंगलमय हो !
विजया दशमी मंगलमय हो !
जीवन सबका सदा अभय हो !
दूर अभावों की बस्ती से,
हो प्यार ,तन-मन निरामय हो !
-रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
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