परमजीत कौर 'रीत'
कुछ समय पहले 'प्रवासी प्रेम पब्लिशिंग, भारत' द्वारा हमारे विद्यालय की ओपन लायब्रेरी के लिए बालसाहित्य की लगभग डेढ़ दर्जन पुस्तकें भिजवाई गई। पुस्तकें इतनी आकर्षक थी कि विद्यार्थियों में इनको पढ़ने की होड़- सी लग गई। कविताओं की पुस्तकों में 'गीत गाते अक्षर ' की कविताओं को उन्होंने काफ़ी पसंद किया । कुछ कविताओं जैसे - हवा चली,आगे बढ़ते जाना, गाँव, जंगल, बरखा रानी, गर्मी आई, जागो, बापू जी आदि कविताओं का उन्होंने समूह वाचन भी किया। मैंने भी जब इस पुस्तक को पढ़ा तो बच्चों की भावनाओं को महसूस किया। इस पुस्तक में 66 छोटी -छोटी बालकविताएँ हैं, जो बच्चों के मनोरंजन के साथ साथ ज्ञानवर्धन भी करती हैं। 'गीत गाते अक्षर' पुस्तक की कुछ ऐसी ही कविताओं की बानगी देखें-
हवा चली रे! हवा चली!
धूल मिट्टी को संग उड़ाती चली.....पृ.सं-15
कभी भी न करना किसी से लड़ाई।...पृ.सं-31
सुनो पापा! ओ मेरे पापा!
हम भी इस बार पेड़
लगाएँगे! ...पृ.सं- 49
भागो नया उजाला लाए,......पृ.सं- 69
मैं भी पंछियों संग, दूर देश उड़
जाता।......पृ.सं.- 82
'गीत गाते अक्षर' (बाल काव्य-संग्रह ) : मनोज कुमार ‘शिव’ मूल्य 180 रुपये, पृष्ठ: 88, संस्करणः 2024, प्रकाशकः प्रवासी प्रेम पब्लिशिंग भारत, 3/186 राजेंद्र नगर, सेक्टर 2, साहिबाबाद, गाजियाबाद । पुस्तक ravasiprempublishing@gmail.com पर संपर्क करके प्राप्त की जा सकती है।
(परमजीत कौर 'रीत',
श्रीगंगानगर राजस्थान
