खुशी कोई बड़ी चीज़
नहीं,
ये तो छोटी-छोटी
बातों में मिलती है,
कभी किसी की
मुस्कान में,
कभी बारिश की बूँदों में खिलती है।
ये हवा के संग बहती
है,
बिन आवाज़ के कहती
है,
रुको ज़रा, महसूस करो,
ज़िंदगी यहीं कहीं
रहती है।
न सोने में, न चाँदी में,
न ऊँचे महलों की
शान में,
खुशी तो छुपी होती
है-
माँ के हाथों के
पकवान में।
जब दिल हल्का हो
जाता है,
और मन गुनगुनाता है,
तब समझो, चुपके से
खुशी तुम्हें छूकर
जाती है।
खुशी होती है
बच्चों की मुस्कान में
तो ढूँढो मत इसे
दुनिया में,
ये तो तुम्हारे
अंदर रहती है,
बस नज़र बदलो थोड़ी
सी,
हर पल खुशी ही कहती
है।
-0-
2-पगडंडी/ सुरभि डागर
पगडंडी कोई साधारण रास्ता नहीं होती,
यह उन कदमों की कहानी होती है
जो बार-बार चलकर उसे जन्म देते हैं।
यह चौड़ी सड़कों की तरह घमंडी नहीं होती,
न ही उस पर शोर-शराबा होता है।
यह चुपचाप खेतों के बीच से निकलती है,
पेड़ों की छाँव में खुद को छिपाती है,
और हर मोड़ पर कोई नई बात कह जाती है।
पगडंडी पर चलते हुए
मन भी हल्का हो जाता है,
जैसे हर कदम के साथ
चिंताएँ पीछे छूटती जाती हैं।
यह हमें सिखाती है
कि मंज़िल तक पहुँचने के लिए
हमेशा बड़े रास्तों की ज़रूरत नहीं होती,
कभी-कभी छोटे, सरल रास्ते भी
सबसे सुंदर सफर बन जाते हैं।
पगडंडी गाँव की धड़कन होती है,
जहाँ हर कदम में अपनापन है,
और हर मोड़ पर एक नई याद छिपी है।
-0-