पथ के साथी

Saturday, May 18, 2024

1417-भक्ति की महिमा

विजय जोशी

 

- जब भक्ति भोजन में प्रवेश करती है,

भोजन प्रसाद बन जाता है।

- जब भक्ति भूख में प्रवेश करती है,

भूख तेज़ हो जाती है,

- जब भक्ति जल में प्रवेश करती है,

जल चरणामृत बन जाता है।

- जब भक्ति यात्रा में प्रवेश करती है,

यात्रा तीर्थयात्रा बन जाती है,

- जब भक्ति संगीत में प्रवेश करती है,

संगीत कीर्तन बन जाता है।

- जब भक्ति घर में प्रवेश करती है,

घर मंदिर बन जाता है,

- जब भक्ति कर्म में प्रवेश करती है,

क्रियाएँ सेवाएँ बन जाती हैं।

- जब भक्ति कार्य में प्रवेश करती है,

काम बन जाता है कर्म,

और

- जब भक्ति मनुष्य में प्रवेश करती है,

इंसान इंसान बन जाता है।