पथ के साथी

Thursday, April 30, 2020

979-अनुभूतियाँ



प्रीति अग्रवाल
1.
पाबन्दी गुनहगार ठहरा रही है
चलो हम ही कह दें कि फ़ुरसत नहीं है!!
2.
दे चुका है बहुत, जो दिया वही काफ़ी
ऐ परवरदिगार! कुछ न दे, बस दे माफ़ी।
3.
ज़्यादा है या कम, खुशी है या ग़म
तेरे हिस्से का जो है, तुझे मिल रहा है।
4.
प्यार के बदले, मैंने सिर्फ प्यार माँगा
'सिर्फ' नहीं पगली, तू माँग बैठी खज़ाना!
5.
हसरत बहुत थी, इक बार करके देखें
इश्क आग दरिया, हम डरे डूबने से!
6.
हम अकेले भले या दुकेले भले
आज़माइश सफ़र में, चलो आज कर लें!
7.
ऐ सुकूँ तू न जाने, कहाँ जा बसा है
पूछा करूँ सबसे, किसी को न पता है!
8.
ऐ दोस्त तू हौले से, दिल पे दस्तक़ दिया कर
जाग जाती हैं यादें, फिर सोने नहीं देतीं!
9.
राहें सिर्फ दो, पर दोराहे गज़ब हैं
कहाँ को ले जाएँ, ये किस्से अजब हैं।
10.
बातों में चली बात, ज़िक्र तेरा भी आया
हमनें नज़रें झुका लीं, कोई पढ़ न पाया!
11.
क्या हुआ जो तुमने अलग राह चुनी है
तुम्हारी खुशी, अब भी मेरी खुशी है!
12.
मजबूर ये हालात, उधर भी थे इधर भी
तुम्हें बेवफ़ा मैं, भला कैसे कह दूँ!
13.
छलनी हो रहे हैं, हम सहते सहते
तुम्हारी तरकश के तीर न थके हैं!
14.
वो बचपन का राजा, वो बचपन की रानी
बड़े मज़े की होती थी उनकी कहानी।
15.
आपबीती का छोटा-सा इतना फ़साना
'सहा भी न जाए, कहा भी न जाए'!!
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