डॉ. वंदना शर्मा
करूँ कैसे आभार मेरे महादेव,
आपने हर पल सँभाला मुझे।
हर मुसीबत से निकाला मुझे,
पथ मेरे कँटीले थे पथरीले थे,
कभी गिरने न दिया मुझे।
मैं नादान थी समझ न पाई,
हर संघर्ष को दुःख ही समझा।
आग से तपाकर निखारा मुझे,
मैंने हमेशा गलत ही माँगा,
आपने वो दिया जो मेरे लिए सही था।
सभी के मुखौटे उतर गए जब,
झूठे रिश्तों के भँवर से निकाला मुझे।
प्रभु दुनिया से तो अकेला कर दिया,
आप साथ रहना, न अकेला करना मुझे।
इतनी कृपा और करना प्रभु,
किसी के दुःख का कारण न बनूँ।
दुःख देना तो सहने की शक्ति भी देना,
राह दिखाना कभी टूटने न देना।
तेरा नाम ही अब सहारा है मेरा,
तू ही भरोसा तू पालनहार है मेरा।
तेरा नाम ही बस रटती जाऊँ,
सुबह-शाम तुझे ही गाऊँ।
ले ले शरण अब अपनी कृपालु,
है नमन बारम्बार तुझे हे दयालु।
