पथ के साथी

Tuesday, August 11, 2026

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शब्द खामोश क्यों हो जाते हैं / डॉ. वंदना शर्मा

 

एक उम्र पर आकर  

शब्द खामोश क्यों हो जाते हैं  

अक्सर बहुत बोलने वाले  

मौन क्यों हो जाते हैं  


 

आसमाँ वही है, वही है धरती  

मौसम के मायने बदल क्यों जाते हैं  

जिसको पाने की जिद में उम्र गुजारी  

उसको पाकर भी हाथ खाली रह जाते हैं  

 

खुशी एक छलावा है पल भर का  

वो पल बीतते ही भाव खुशी के  

नीरस हो जाते हैं  

 

जाने किस अंधी दौड़ में  

दौड़ रही है दुनिया सारी  

जब सब कुछ खो जाए  

कुछ पाने के अर्थ व्यर्थ हो जाते हैं  

 

कभी जिससे बात करने को  

तरसता था मन सारे दिन  

सामने पाकर उसे अपने  

लब खामोश क्यों हो जाते हैं  

 

चारों तरफ मेला है भीड़ का  

फिर भी क्यों हम खुद को  

भरे मेले में अकेला पाते हैं  

 

गलत कहते हैं लोग अक्सर  

अज्ञानता दुख का कारण है  

मैंने तो देखा है अक्सर  

सब जानकर रिश्ते टूट जाते हैं।

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12 comments:

  1. डाॅ.वंदना शर्मा जी को कविता 'शब्द खामोश क्यों हो जाते हैं' सार्थक सृजन के लिए हार्दिक बधाई।
    विभा रश्मि

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    1. आभार विभा जी। मेरा उत्साह बढ़ाने के धन्यवाद आपका आदरणीय।

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  2. सार्थक, सुंदर भावाभिव्यक्ति ।हार्दिक बधाई डॉ वंदना शर्मा जी। सुदर्शन रत्नाकर

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    1. आभार आपका आदरणीय 🙏

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  3. बहुत सुन्दर, मार्मिक अभिव्यक्ति। बधाई, डॉ. वंदना शर्मा जी

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    1. आभार आपका आदरणीय 🙏

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  4. बेहतरीन रचना
    वंदन

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    1. आभार आपका आदरणीय 🙏

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  5.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में  शुक्रवार 14 अगस्त, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  6. बहुत सुंदर रचना

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  7. बहुत ही ख़ूबसूरत, यथार्थ को दर्शाती कविता है, सीधे दिल में उतर गई!

    ~सादर
    अनिता ललित

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