पथ के साथी

Monday, August 15, 2016

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वन्दे मातरम्
डॉ योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’

लहराएँ हम आज तिरंगा,
करें राष्ट्र का नित वंदन!
मिलकर बोलें सभी साथियो,
वन्दे, वन्दे मातरम!
जो भारत पर कुर्बान हुए,हम याद करें उन वीरों को!
क्रूर फिरंगी से जूझी जो,उन मतवाली शमशीरों को!!
उन वीरों का जयघोष करें,
कुर्बान हुआ जिनका जीवन!
मिल कर बोलें सभी साथियों,
वन्दे, वन्दे मातरम्!
काश्मीर है मुकुट हमारा,सारी दुनिया को बतला दें!
जो भी आँख उठाए इस पर,नरक उसे हम पहुँचा दें!!,
बतला दें सारी दुनिया को,
है जान से प्यारा हमें वतन!
मिल कर बोलें सभी साथियों,
वन्दे, वन्दे मातरम्!
हम भगत सिंह के वंशज हैं,

है प्राण से प्यारी आज़ादी!
इसके आड़े जो आएगा,उसकी है निश्चित बरबादी!!
आज़ाद तिरंगा लहराएगा,
न्योछावर इस पे हैं तन-मन!
मिल कर बोलें सभी साथियों,
वन्दे, वन्दे मातरम्!
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पूर्व प्राचार्य,74/3,न्यू नेहरु नगर,रूडकी-247667
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Saturday, August 13, 2016

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सच्चा जश्न (गीत) मात्रा-भार 16-14
डॉ.पूर्णिमा राय,अमृतसर।
आज़ादी का दिवस सुहाना नई उमंगे लाया है।
भारत की माटी के रँग में जग को रंगने आया है।।

गीत तराने गूँज रहें हर गली-गली चौबारे में
आज़ादी का भाषण देते नेता हर गलियारे में
रंग तिरंगा खिलता तन पर मन में जोश समाया है।।

नवयुग में नई सोच से भारत आगे कदम बढ़ायेगा
गौरवशाली देश तिरंगा दुनिया में लहराएगा
प्रेम-समर्पण दया-धर्म भारत का सबको भाया है।।

छोड़ गये जो यादें अपनी उन वीरों को नमन करें
वीरों के परिवारों के हम मिलकर रिसते जख्म भरें
खुशियाँ देकर कहे
‘पूर्णिमा’ सच्चा जश्न मनाया है।।
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Sunday, August 7, 2016

652




1-कुछ देर तो
डॉ योगेंद्र नाथ शर्मा ‘अरुण’

कुछ देर  तो  बातें करें हम, आइए!
दिल का खालीपन भरें हम, आइए!!

ये है अँधेरा बढ़ रहा चारों  तरफ ही,
अब रोशनी बनकर झरें हम,आइए!!

मौत आनी लाज़मी है,जानते हैं हम,
क्यूं  मौत से पहले  मरे हम, आइए!!

जो नहीं भाता हमें अपने लिए साथी,
क्यूं आप की खातिर करें हम,आइए!!

कोई तो है वो, जो देखता है सबको ही
बस  'अरुण' उस से  डरें हम, आइए!!
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पूर्व प्राचार्य,74/3,न्यू नेहरू नगर,रुड़की-247667 





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2-रामेश्वर काम्बोज  ‘हिमांशु’

बीच सफ़र में कुछ छूटेंगे, कुछ तोड़ेंगे  सपने
थोड़े से होंगे बेगाने  , अनगिन होंगे  अपने
इन अपनों से ,बेगानों से , कब तक डरकर जीना
बहुत दिनों तक नहीं चलेगा, छुपकर आँसू पीना
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