पथ के साथी

Monday, September 14, 2026

1524-जय हिंदी, जय जय जय हिंदी!

डॉ. शिवजी श्रीवास्तव


जय हिंदी
, जय जय जय हिंदी

भारत माँ की सुन्दर बिंदी।

सबसे प्यारी भाषा हिंदी

 

सबके मन को भाती हिंदी

सब पर प्यार लुटाती हिंदी

मीठे बोल सिखाती हिंदी

सबको गले लगाती हिंदी

 

गंगाजल- सी पावन है

तुलसी की रामायन है .

है कबीर का ज्ञान यहाँ

सूरदास रसखान यहाँ

 

हिंदी का हम मान बढ़ाएँ

मिलकर इसका यश फैलाएँ

हिंदी का हम दिवस मनाएँ

एक साथ सब मिलकर गाएँ

 

जय हिंदी,

जय जय जय हिंदी!

भारत माँ की सुन्दर बिंदी।

सबसे प्यारी भाषा हिंदी

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3 comments:

  1. डॉ. शिवजी श्रीवास्तव की कविता *"जय हिंदी, जय जय जय हिंदी"* हिंदी भाषा के प्रति गहरे सम्मान का भावपूर्ण उद्गार है।

    यह कविता हिंदी को 'भारत माँ की सुन्दर बिंदी' कहकर गौरवान्वित करती है। सरल, लयबद्ध और गीतात्मक भाषा में कवि ने हिंदी को मीठे बोल सिखाने वाली, सबको गले लगाने वाली, गंगाजल-सी पावन बताया है। तुलसी, कबीर, सूरदास जैसे कवियों का स्मरण कर कविता हिंदी की समृद्ध परम्परा को जोड़ती है।

    यह रचना हिंदी दिवस पर हिंदी का मान बढ़ाने और सबको मिलकर गाने का प्रेरक आह्वान है। डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली

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    1. बहुत मधुर,सुन्दर, लयबद्ध रचना की बधाई!!!
      शीला मिश्रा

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  2. सहज सरल मनभावन रचना सर 🙏💐

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