पथ के साथी

Wednesday, August 31, 2016

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1-आशा-दीप जले
डॉ योगेन्द्र नाथ शर्मा अरुण
आशा-दीप जले जो मन में,
दीपित यह जग हो जाए।


कर्म सभी को गति देता है,

विश्वास ह्रदय में भर देता।
दूर निराशा भागे पल में,
अमृत मन को कर देता।।



कर्म-मन्त्र जो मिले जगत को,
अमृत यह जग हो जाए।



स्वार्थ ख़ुशी देंगे जीवन में,
लेकिन मुक्ति नहीं पाओगे।
सुख औरों को दोगे जब भी,
स्वयं देवता बन जाओगे।।



परोपकार जो आए मन में,
उपकृत यह जग हो जाए।



याद वही आते हैं जग में,

जो औरों को सुख देते हैं।
सबको अमृत बाँट रहे हैं,
विष सारा खुद ले लेते हैं।!



यही भावना हो जो सब की,
पुलकित यह जग हो जाए।
 -0-
डॉ योगेन्द्र नाथ शर्मा
अरुण ,पूर्व प्राचार्य,74/3,न्यू नेहरू नगर,रुड़की-247667
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2-

पुस्तक समीक्षाः
*अहसास -ए -अल्फाजः एक दृष्टिपात:
डॉ.पूर्णिमा राय
कवि मन की कल्पना जब वैयक्तिकता की परिधि से ऊपर उठकर सामाजिकता की ओर अग्रसर होती है तो हृदय में व्याप्त अहसास शब्दों के रूप में कागज़ पर उतरने हेतु व्याकुल हो जातें हैं।मीनाक्षी सुकुमारन रचित काव्य संग्रह मात्र शब्दों का ताना बाना नहीं है ,वरन् समय ,स्थान एवं परिस्थितिजन्य भावनाओं का प्रस्फुटन है।बाल्यावस्था से यौवनावस्था की पगडंडी पर चलते हुए मार्ग की बाधाओं का सामधा करते हुए लेखन को शिथिल न होने देना,वरन् और दृढ़ता से अपने अहसासों को संजोना ,इस काव्य संग्रह की महती विशेषता है।
* बातों में सरलता,वाणी की  मिठास,अपनापन ,प्रथम भेंट में दूसरों को अपना बना लेना मीनाक्षी जी में विशेष गुण हैं।वाट्स एप के माध्यम से हुई भेंट ने एवं उनके काव्य संग्रह की रचनाओं ने मुझे अपनी बात रखने को बाध्य कर दिया।प्रस्तुत संग्रह की प्रत्येक रचना परिपूर्णता लिये हुए है।चाहे वह इस संग्रह की प्रथम कविता "ख्वाब या हकीकत" हो अथवा अंतिम कविता" कैसे कह दूँ हो"?
*प्राकृतिक छटा बिखेरती रचनाएँ सड़क और मैं, प्यार के फूल,दो किनारे ,बारिश की बूँदें,सूखा पत्ता,शीशे सा दिल,हैरान है कुदरत भी,बिखरे सपने,आदि बहुत ही सुंदर एवं संदेशपरक रचनाएँ लगीं।ये अतुकांत कविताएँ अपनी सरसत और सहजता से पाठक को आकर्षित करती हैं।जिस तरह मानव जीवन में हालात सदैव एक जैसे नहीं रहते,वैसे ही इस संग्रह की रचनाएँ  विविध विषयों को आत्मसात किए हुए हैं।आज समय की माँग है ...बेटी बचाओ।मीनाक्षी जी ने इसे महसूस किया और बेटी पर लिख डाली रचना।जो "बेटी बचाओ--बेटी सजाओ" क्षणिका के माध्यम से वर्णित है।
*"बेवफा "कविता की निम्न पंक्तियाँ वर्तमान जीवन में प्रेम में मिली बेवफाई का सटीक उदाहरण है...
*अच्छा ही हुआ जो
दे दिया नाम बेवफा का तूने
हम तो यूँ ही जोड़ने लगे थे
दिल को दिल से!!

*नारी जीवन की सार्थकता को बड़े ही भावपूर्ण रूप से नारी हूँ नारी ही कहलाऊँ कविता में मीनाक्षी जी दर्शाती हैं।यद्यपि यहाँ उन्हें ऐतिहासिक नारी पात्रों का स्मरण रहा है 
तथापि वह केवल सीता ,मीरां,राधा ,गांधारी,लैला
सोहनी ,देवी आदि बनने को आतुर नहीं ,वरन् एक सामान्य नारी के मान सम्मान ,हक व प्रतिष्ठा की बात करतीं हैं। " टूटन " कविता रिश्तों में आई दरारों से उत्पन्न दर्द को भोगती मीनाक्षी जी नजर आती है...
"आँख में आँसू हैं
दिल में दुआ फिर  भी
हुआ आज फिर खून रिश्तों का
जिसे सींचा था अपने दिल से!!"

*वाईस पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित अहसास- ए-अल्फाज़ 104 पृष्ठों का संग्रह है। इसमें सम्मिलित अतुकांत रचनाओं को ऋषि अग्रवाल जी ने बड़ी ही खूबसूरती से संजोकर रखा हैं जिससे हर रचना की गुणवत्ता का अंकन सहजता से किया जा सकता है।
समीक्षक
डॉ.पूर्णिमा राय,शिक्षिका एवं लेखिका(अमृतसर)
Managing Editor,Business Sandesh Magzine
Delhi.

drpurnima01.dpr@gmail.com

Monday, August 29, 2016

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लोक-शैली रसिया पर आधारित रमेशराज की दो तेवरियाँ
1
रमेशराज
मीठे सोच हमारे, स्वारथवश कड़वाहट धारे
भइया का दुश्मन अब भइया घर के भीतर है।

इक कमरे में मातम, भूख गरीबी अश्रुपात गम
दूजे कमरे ताता-थइया घर के भीतर है।

नित दहेज के ताने, सास-ननद के राग पुराने
नयी ब्याहता जैसे गइया घर के भीतर है।

नम्र विचार न भाये, सब में अहंकार गुर्रा
हर कोई बन गया ततइया घर के भीतर है।

नये दौर के बच्चे, तुनक मिजाजी-अति नकनच्चे
छटंकी भी अब जैसे ढइया घर के भीतर है।
2
खद्दरधरी पट्ठा, जन-जन के अब तोड़ें गट्टा
बापू के भारत में कट्टा देख सियासत में।

तेरे पास न कुटिया, तन पर मैली-फटी लँगुटिया
नेताजी का  ऊँचा अट्टा देख सियासत में।

तेरी मुस्कानों पर, रंगीं ख्वाबों-अरमानों पर
बाजों जैसा रोज झपट्टा देख सियासत में।

खुशहाली के वादे, तूने भाँपे नहीं इरादे
वोट पाने के बाद सिंगट्टा देख सियासत में।
-0-

परिचय रमेशराज
पूरा नाम-रमेशचन्द्र गुप्त
पिता- लोककवि रामचरन गुप्त
जन्म-15 मार्च 1954, गाँव-एसी, जनपद-अलीगढ़
शिक्षा-एम.ए. हिन्दी, एम.ए. भूगोल
सम्पादन-तेवरीपक्ष [त्रैमा. ]
सम्पादित कृतियाँ-1-अभी जुबाँ कटी नहीं,2. कबीर जि़न्दा है ,3. इतिहास घायल है,
4-एक प्रहारः लगातार [ सभी तेवरी संग्रह ]
स्वरचित कृतियाँ-रस से संबंधित-1. तेवरी में रससमस्या और समाधान 2-विचार और रस [ विवेचनात्मक निबंध ] 3-विरोध-रस 4. काव्य की आत्मा और आत्मीयकरण
तेवर-शतक-लम्बी तेवरियाँ-1. दे लंका में आग 2. जै कन्हैयालाल की 3. घड़ा पाप का भर रहा 4. मन के घाव नये न ये 5. धन का मद गदगद करे 6. ककड़ी के चोरों को फांसी 7.मेरा हाल सोडियम-सा है 8. रावण-कुल के लोग 9. अन्तर आह अनंत अति 10. पूछ न कबिरा जग का हाल
शतक-1.ऊघौ कहियो जाय [ तेवरी-शतक ] 2. मधु-सा ला [ शतक ]3.जो गोपी मधु बन गयीं [ दोहा-शतक ] 4. देअर इज एन ऑलपिन [ दोहा-शतक ] 5.नदिया पार हिंडोलना [ दोहा-शतक ] 6.पुजता अब छल [ हाइकु-शतक ]
मुक्तछंद कविता-संग्रह-1. दीदी तुम नदी हो  2. वह यानी मोहन स्वरूप
बाल-कविताएं- 1.राष्ट्रीय बाल कविताएं
प्रसारण-आकाशवाणी मथुरा व आगरा से काव्य-पाठ
सम्मानोपाधि- ‘साहित्यश्री, उ.प्र. गौरव, तेवरी-तापस, शिखरश्री
अभिनंदन-सुर साहित्य संगम [ एटा ] , शिखर सामाजिक साहित्कि संस्था अलीगढ़
अध्यक्ष-1.सार्थक सृजन [ साहित्यक संस्था ] 2.संजीवन सेवा संस्थान ;सामाजिक सेवा संस्था 3.उजाला शिक्षा एवं सेवा समिति [ सामाजिक संस्था ]
पूर्व अध्यक्ष-राष्ट्रीय एकीकरण परिषद, उ.प्र. शासन, अलीगढ़ इकाई
सम्प्रति-दैनिक जागरण से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में सम्बद्ध
सम्पर्क-15/109, ईसानगर, निकट-थाना सासनी गेट, अलीगढ़[ उ.प्र. ]
मोबा. 09634551630
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