पथ के साथी

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Wednesday, August 12, 2015

स्त्रियाँ



1-स्त्रिया
 डॉ नूतन गैरोला


डॉ०नूतन गैरोला

गुजर जाती हैं अजनबी जंगलों से
अँधेरों में भी
जानवरों के भरोसे
जिनका सत्य वह जानती हैं

सड़क के किनारे तख्ती पर लिखा होता है
सावधान, आगे हाथियों से खतरा है
और वह पार कर चुकी होती हैं जंगल सारा

फिर भी गुजर नहीं पातीं
स्याह रात में सड़कों और बस्तियों के बीच से
काँपती है रूह उनकी
कि
तख्तियाँ
उनके विश्वास की सड़क पर
लाल रंग से जड़ी जा चुकी हैं
यह कि
सावधान! यहाँ आदमियों से खतरा है
-0-

डॉ नूतन गैरोला:  चिकित्सक (स्त्री रोग विशेषज्ञ), समाजसेवी , लेखिका और सहृदय कवयित्री हैं। हिन्दी हाइकु और त्रिवेणी से भी जुड़ी हैं। गायन और नृत्य से भी लगाव। पर्वतारोहण जैसी गतिविधियों में भी भाग लेती रही हैं। उदारमना नूतन  पति के साथ मिल कर पहाड़ों में दूरस्थ क्षेत्रों में नि:शुल्क स्वास्थ -शिविर लगाती रही  हैं।  अब सामाजिक संस्था धाद के साथ जुड़कर पहाड़ ( उत्तराखंड ) से जुड़े कई मुद्दों पर परोक्ष -अपरोक्ष रूप से ( अपने नाम के प्रचार से कोसों दूर)काम करती हैं। पत्र पत्रिकाओं में कुछ रचनाओं का प्रकाशन.
     -0-
2-निरुत्तर
सविता अग्रवाल 'सवि'

जब जब तुमने प्रश्न किये
मेरे मुख से  स्वतः ही
उन के उत्तर निकले
परन्तु हर प्रश्न से
एक नए प्रश्न का जन्म हुआ
तुम प्रश्न करते गए
मैं उत्तर देती गई
यही क्रम बहुत देर तक चला
प्रश्नों की एक बाढ़
मेरे मस्तिष्क में आ गई
और मैं स्वयं उसमें
डूबने- सी लगी
अपने को उस भँवर से
निकालने की खातिर
प्रश्न को प्रश्न ही रहने दो
कोई उत्तर न दो ,सोच कर
मैं निरुत्तर हो गई |
 -0-

Saturday, July 16, 2011

पात-प्रतिक्रिया

पात-प्रतिक्रिया
[1-रचना श्रीवास्तव,2-शैल अग्रवाल ,3-डॉ हरदीप सन्धु,4-ॠता शेखर मधु  5-रवि रंजन,6-मंजु मिश्रा 7-डॉ नूतन डिमरी,8-रेखा रोहतगी ने अपनी सार्थक टिप्पणियों से मेरा मान ही नहीं बढ़ाया वरन् ‘वाह !वाह! बढ़िया’ जैसी चलताऊ टिप्पणियों से बचते हुए सार्थक प्रतिक्रियाएँ प्रस्तुत कीं। ये सिर्फ़ प्रतिक्रियाएँ ही नहीं, श्रेष्ठ हाइकु के उदाहरण भी हैं ; अत: मैं इन्हे  अलग से देने का लोभ संवरण नहीं कर सका । रवि रंजन जी ने हाइगा,हाइकु और कुही के स्वरूप को सिर्फ़ एक हाइकु में परिभाषित कर दिया, काव्यशास्त्रीय रूप में। मैं आप सबका बहुत कृतज्ञ हूँ।]
1-रचना श्रीवास्तव
1
काँटे चुभे न
बदन , हिलने से
डरे हैं पात
2
राही को छाया
वृक्ष को दे भोजन
पत्ते का काम
-०-
2-शैल अग्रवाल [सम्पादक: लेखनी डॉट नेट -हिन्दी एवन अंग्रेज़ी]
1
फिर आए ये
भोजपत्र आस के
हमारे नाम।
2
पीत पर्ण जो
झरने दो उनको
रोको ना आज।
3
ओस-सा-मन
हवा की छु्अन से
सिहरा गात।
3-डॉ हरदीप सन्धु
1
सुन्दर पात
आपकी छुअन से
सुंदर और !
2
नर्म -नर्म से
हरीतिमा बिखेरें
ये डाल-डाल !
3
पात झरें तो
यूँ बिखर जाएँगें
गली -गली में !
4
सूखे पात तो
फिर से फिर होंगे
हरे कचूर
5
ओ मन तेरा
मुरझा जाए कभी
देखो पात को !

0-

4-ऋता शेखर 'मधु'
    1
नव जीवन
कोमल किसलय
प्राण -संचार।
2
हरे पात दें
प्राणवायु प्राणी को
विष वायु से
5-रवि रंजन
1
चित्र हाइगा
शब्द से है हाइकु
पत्थर कुही।
6-मंजु मिश्रा
कहने को तो
चार आखर पर
अर्थ अनंत
7-डॉ नूतन डिमरी
हरा है अभी,
चाहूँ- रोकूँ समय,
पतझड़ को

8-रेखा रोहतगी

1
-टीका क्यों माथ 
हाइकु व हाइगा
सुन्दर साथ .
2
आपके शोध 
जगाते हैं मन में 
सौन्दर्यबोध