पथ के साथी

Friday, September 18, 2026

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दिल खुश है अकेला / डॉ.न्दना शर्मा 

 

दिल खुश है अकेला

नहीं चाहिए कोई झमेला

जिन्हें कद्र नहीं हमारी

उनसे दूरी ही अच्छी

जो सुनना नहीं चाहते

उनके लिए चुप्पी ही अच्छी

व्यर्थ ऐसे रिश्तो के लिए

अपने शब्द, भाव देना

अपनी डायरी, कलम ही

होती सबसे अच्छी

ये नदिया, भी तो

बहती चुपचाप मस्त

पहाड़ भी रहते तने

रहते शांत खड़े

फूल भी देखो खिलते हैं

बिना किसी उम्मीद के

जिंदगी भले छोटी हो

जिंदगानी बड़ी  जागी

 

कोई पढ़े ना पढ़े

कहानी लिखी जागी

बात निकली है तो

कहीं तो जरूर जागी

vandna.reporter@gmail.com

4 comments:

  1. वाह बहुत सुन्दर 🙏बात निकली है तो कहीं तो जरूर जाएगी

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    1. आभार आपका आदरणीय mam

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  2. बहुत बढ़िया ।सुदर्शन रत्नाकर

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    1. आभार आपका आदरणीय 🙏

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