पथ के साथी

Friday, September 4, 2026

1519-कन्हैया

 1- ओ कन्हैया /डॉ. कनक लता मिश्रा 

 


ले लो अपनी शरण में कन्हैया 

रखलो हमको भी पलको की छइयाँ

ओ कन्हैया…

सौप दिए अपने सब रंग तुमको 

अपने ही रंग में अब रँग लो ना हमको 

कुछ भी मेरा ना मैं क्या दूँ रंगया 

ओ कन्हैया 

ले लो अपनी…

 

अपना नहीं जग में कुछ भी ओ कृष्णा 

मन से मिटे मोह माया न तृष्णा 

पार तुम ही करो मोरे बंसी बजया 

ओ कन्हैया 

ले लो अपनी…

 

झूठ कपट छल में डूबा जगत् है 

बिखरा जीवन में बिखरा अँधेरा विकट है 

लिखके कान्हा भरो मोरी कोरी चुनरिया 

ओ कन्हैया 

ले लो अपने..

-0-

ओ कान्हा! आया जन्मदिन तेरा/ डॉ. वंदना शर्मा

 


ओ कान्हा! आया जन्मदिन तेरा

फूल चढ़ाऊँ, माखन खिलाऊँ

घर को सजाऊँ, बता

तुझे कैसे रिझाऊँ

 

ओ कान्हा! आया जन्मदिन तेरा

फल चढ़ाऊँ, मेवा चढ़ाऊँ

मन के सुमन भी सारे

तुझे अर्पण कर जाऊँ

बता तुझे कैसे रिझाऊँ

 

ओ कान्हा, आया जन्मदिन तेरा

भजन गाऊँ, आरती गाऊँ

सुबह शाम, आठो याम

नाम तेरा बस रटती जाऊँ

बता तुझे कैसे रिझाऊँ

 

ओ कान्हा! आया जन्मदिन तेरा

 

सबकी बिगड़ी बनाए

मुरली ऐसी सुनाए

पल में कर दे

खुशियों की छाँ

बता तुझे कैसे रिझाऊँ

ओ कान्हा आया जन्मदिन तेरा

vandna.reporter@gmail.com

 

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