पथ के साथी

Sunday, August 15, 2021

1125-आज़ादी के मायने

 रश्मि विभा त्रिपाठी 'रिशू'

 

आज 15 अगस्त है


आँख खुलते ही

आज़ादी  के मायने

याद आए

जो ज़्यादातर के लिए

यही हैं

बिल्कुल सही हैं

कार्य-स्थल पर

कुछ नारे लगवाने हैं

देश-भक्ति के गीत गाने हैं

अमर शहीदों को

श्रद्धांजलि-सुमन

अर्पित कराने हैं

बच्चों के हाथों में

तिरंगे थमाने हैं

बूँदी के दौने

बँटवाने हैं

कुछ घर के लिए

बचाने हैं

आखिर उन्हें भी तो

ये उत्सव मनाने हैं

रैली निकाली जानी है

एक सभा

आयोजित करानी है

अपना पक्ष

गम्भीरता से रखना है

भाषण में करना है

परतन्त्रता का विरोध

स्वतंत्रता में बड़ा अवरोध

जो सदा से है

फिर साहब को

घर वापस जाना है

स्व-सुविधा हेतु

कुसुमा पर

दिन भर हुकुम चलाना है

शोषण मुक्ति की बात

साहब

मजदूर दिवस पर अगली बार करेंगे

फिर भाषण दे दासी का उद्धार करेंगे।

Saturday, August 14, 2021

1152-क्षणिकाएँ

 

दिनेश चन्द्र पाण्डेय

 

क्षणिकाएँ

1.

फ्रंट से आया

बेटे का सामान

माँ नें हाथ फिरा

ऐसे दुलारा जैसे बेटा

खुद लौट आया हो.

2.

झुलसाती दोपहर

बनते भवन की छाया में

पल भर को

तसला परे रख

उसने सोचा...

कितना अच्छा होता

यदि संतुलित होते मौसम

गर्मियों में अधिक गर्मी

सर्दियों में न अधिक सर्दी

बारिश भी नाप तोल कर आती.

3.

बह रही जीवन- नदी से

भरी थी मैंने भी

 दो लोटे पानी से

अपनी गागर

रीती जा रही गागर

बहती जा रही नदी.

4.

खिलने के पहले ही

तोड़ लिये गुच्छों में

सुर्ख फूल

धूप में सुखाया

फिर आग पर  

तब कहीं जाकर

 लौंग कली की

 फैली सुगंध

5.

वर्षा ख़त्म करने का

बादल भगाने का

सीधा सरल उपाय

वृक्ष काट दो

6.

पहाड़ पर घूमता बाघ

उसके हर दौरे के बाद

चरवाहे की भेड़

गिनती में कम हो जाती

बढ़ता जाता बाघ के

मुँह पर लगा खून

7.

रात को गिरती बर्फ़

सो रहा सर्द पहाड़

एक घर से चीख उठी

कुछ बल्ब जले

स्त्री- पुरुषों की भाग दौड़

सुगबुगाहट शुरू

फिर........

नवजात चीख़ से जागा पहाड़

8.

शाम को थका हुआ

मैं घर आया.

वो गोद में आकर

जीभ से मेरी

थकान उतारता गया.

9.

पहाड़ की नारी

गोरु-बाछ, चारा लकड़ी

कनस्तरों पानी, खाना

 फिर भी....

अधूरा पड़ा है काम

अस्ताचल की ओर

भागते रवि को तरेरती

आँखों आँखों में डाँटती

10.

शाम के साथ

श्रमिक कंधे पर

कुठार सँभालते

घर को चले

पेड़ों ने भी खैर मनाई

सुबह होने तक

-0-

Wednesday, August 4, 2021

1123-मिलेंगे जल्दी ही

 

सोनिया शर्मा रिक्खी

 

जाने ना जाने करोना क्या- क्या दिखा गया

सोशल साइंस टीचर को सोशल डिस्टेंसिंग सिखा गया


क्या कहने उस कप्तान के

जिसने मुश्किल समय में सँभाली है

आन- बान- शान से

शिक्षा रूपी नाव की कमान

ऐसे शिक्षाविदों को मेरा प्रणाम

न जाने करोना क्या -क्या सिखा गया

क्या कहने उन अध्यापकों के सीख रहे हैं नए-नए गुर पढ़ाने के

अपने विद्यार्थियों की समस्याएँ सुलझाने के

नए तरीकों से समझाने के

ऐसे शिक्षकों को मेरा प्रणाम

कि स्कूल में कदम रखते ही

हँसते चेहरों को देखने और मुँह पर भोली मुस्कान-

कहते थे गुड मॉर्निंग ,सुनने को तरसते कान

आती है याद तुम्हारी बच्चो ,प्यारी मुस्कान !

दूर से ही सही ऑनलाइन टीचिंग से

तुमसे संपर्क बढ़ाने को

तुम तक पहुँच जाने को

करती हूँ मैं कोशिशें हजार

मिलेंगे जल्दी ही करते रहो

तुम करोना युद्ध में करोना पर पलटवार

धोते रहो मेरे बच्चों हाथ तुम बारम्बा

कैसे भूल जाऊँ इन क्षणों को

अभिभावकों के सहयोग को

बने हैं सेतु

मुझे पहुँचा रहे हैं

मेरे नन्हे मुस्कुराते मन में

ज्ञान की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों तक

करोना तू बहुत कुछ सिखा गया

 टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल करना बता गया

-0- अंबाला शहर- 134004