रश्मि विभा त्रिपाठी 'रिशू'
आज 15 अगस्त
है
आँख खुलते ही
आज़ादी के मायने
याद आए
जो ज़्यादातर
के लिए
यही हैं
बिल्कुल सही हैं
कार्य-स्थल पर
कुछ नारे लगवाने हैं
देश-भक्ति के गीत गाने
हैं
अमर शहीदों को
श्रद्धांजलि-सुमन
अर्पित कराने हैं
बच्चों के हाथों में
तिरंगे थमाने हैं
बूँदी के दौने
बँटवाने हैं
कुछ घर के लिए
बचाने हैं
आखिर उन्हें भी तो
ये उत्सव मनाने हैं
रैली निकाली जानी है
एक सभा
आयोजित करानी है
अपना पक्ष
गम्भीरता से रखना है
भाषण में करना है
परतन्त्रता का विरोध
स्वतंत्रता में बड़ा अवरोध
जो सदा से है
फिर साहब को
घर वापस जाना है
स्व-सुविधा हेतु
कुसुमा पर
दिन भर हुकुम चलाना है
शोषण मुक्ति की बात
साहब
मजदूर दिवस पर अगली बार करेंगे
फिर भाषण दे दासी का उद्धार करेंगे।


