पथ के साथी

Thursday, January 1, 2026

1477-नया साल

 नया साल/ डॉ.सुरंगमा यादव

 

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 2-साल पुराना चला गया /डॉ. कनक लता

 

कुछ खट्टे, कुछ मीठे, कुछ कड़वे लम्हों को सँजोया गया

कभी ख़ुशनुमा हुई ज़िन्दगी, तो कभी पलकों को भिगोया गया

नव वर्ष को आमंत्रित करके, साल पुराना चला गया

 

कुछ ख़ास- सा मिला कभी, कुछ क़ीमती खोया भी गया

कुछ रंग उड़ चले तो कुछ और रंगों को उकेरा भी गया

खुशियों का आह्वान करके, साल पुराना चला गया

 

कभी दिव्य प्रकाश पसर गया, कभी घोर अँधेरा छा गया

कुछ सुरमई सरगम सजी, कभी बेसुरा स्वर गा गया

नवगीत, नव लय, नव ताल देकर, साल पुराना चला गया

 

कुछ पुष्प आस के खिले कभी, दलपुंज कभी कोई झ गया

पतझर सुखाया पात सारे, तो बहार फिर से खिला गया

सुख-दुख तो हैं जीवन के पहलू, साल पुराना सिखा गया

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3 comments:

  1. नव वर्ष आधारित दोनों कविताएँ बहुत प्यारी हैं .-रीता प्रसाद

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  2. आँग्ल नववर्ष के उपलक्ष्य पर आधारित अच्छी कविताएँ -शुभकामनाएँ।
    प्रकृति सौंदर्य और आशावाद का संचार करती सुंदर पंक्तियाँ।

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  3. मेरी सामान्य सी पंक्तियों को सहज साहित्य में स्थान देने के लिए काम्बोज भइया को तहे दिल से धन्यवाद...🙏🏻
    सुश्री सुरंगमा जी की कविता बहुत ही अर्थपूर्ण और सुन्दर है....🙏🏻👏🏻👏🏻

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