नया साल/ डॉ.सुरंगमा यादव
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कुछ
खट्टे,
कुछ मीठे, कुछ कड़वे लम्हों को सँजोया गया
कभी
ख़ुशनुमा हुई ज़िन्दगी, तो कभी पलकों को भिगोया गया
नव
वर्ष को आमंत्रित करके, यह साल पुराना
चला गया।
कुछ
ख़ास- सा मिला कभी, कुछ क़ीमती खोया भी गया
कुछ
रंग उड़ चले तो कुछ और रंगों को उकेरा भी गया
नई
खुशियों का आह्वान करके, यह साल पुराना
चला गया
कभी
दिव्य प्रकाश पसर गया, कभी घोर अँधेरा
छा गया
कुछ
सुरमई सरगम सजी,
कभी बेसुरा स्वर गा गया
नवगीत, नव
लय, नव ताल देकर, यह साल पुराना चला गया।
कुछ
पुष्प आस के खिले कभी, दलपुंज कभी कोई झर गया
पतझर
सुखा गया पात सारे, तो बहार फिर से खिला गया
सुख-दुख
तो हैं जीवन के पहलू, यह साल पुराना
सिखा गया।
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नव वर्ष आधारित दोनों कविताएँ बहुत प्यारी हैं .-रीता प्रसाद
ReplyDeleteआँग्ल नववर्ष के उपलक्ष्य पर आधारित अच्छी कविताएँ -शुभकामनाएँ।
ReplyDeleteप्रकृति सौंदर्य और आशावाद का संचार करती सुंदर पंक्तियाँ।
मेरी सामान्य सी पंक्तियों को सहज साहित्य में स्थान देने के लिए काम्बोज भइया को तहे दिल से धन्यवाद...🙏🏻
ReplyDeleteसुश्री सुरंगमा जी की कविता बहुत ही अर्थपूर्ण और सुन्दर है....🙏🏻👏🏻👏🏻