अनिता ललित को उनकी 2014 में प्रकाशित काव्य-कृति 'बूँद-बूँद लम्हें' पर लोपामुद्रा सम्मान प्रदान किया
गया । सभी साथियों की ओर से आपको हार्दिक बधाई !
पथ के साथी
Saturday, May 9, 2015
Thursday, May 7, 2015
अनोखा ऐसा रिश्ता
अनोखा ऐसा रिश्ता
डॉ०भावना
कुँअर
![]() |
| छाया:ऐश्वर्या कुँअर |
हर सुबह
ये लॉरीकीट जोड़ा
आवाज़ देता
मैं दौड़ी-दौड़ी जाती।
क्या-क्या कहता
समझ नहीं आता।
वह मेरे यूँ
चक्कर जो लगाता
मैं झट जाती
हाथों में दाने भर
यूँ ही आ जाती।
पलक झपकते
हाथों पे आ बैठते,
मुझे देखते
हौले-हौले चुगते,
न तो डरते
न ही मुझे डराते।
कैसा ये रिश्ता!
अटूट औ स्नेहिल।
सब अलग-
भाषा,जाति,रूप औ
रंग, फिर भी
समझते हैं हम
एक दूजे की,
सभी भावनाओं को
जरूरतों को,
ये कितना गहरा
सूझ-बूझ औ
प्यार से लबालब
अनोखा रिश्ता!
भाषा,जाति औ रूप
एक है होता
फिर भी जाने क्यों न
मिलता ऐसा
इंसानों के बीच ये
अनोखा प्यारा रिश्ता।
ये लॉरीकीट जोड़ा
आवाज़ देता
मैं दौड़ी-दौड़ी जाती।
क्या-क्या कहता
समझ नहीं आता।
वह मेरे यूँ
चक्कर जो लगाता
मैं झट जाती
हाथों में दाने भर
यूँ ही आ जाती।
पलक झपकते
हाथों पे आ बैठते,
मुझे देखते
हौले-हौले चुगते,
न तो डरते
न ही मुझे डराते।
कैसा ये रिश्ता!
अटूट औ स्नेहिल।
सब अलग-
भाषा,जाति,रूप औ
रंग, फिर भी
समझते हैं हम
एक दूजे की,
सभी भावनाओं को
जरूरतों को,
ये कितना गहरा
सूझ-बूझ औ
प्यार से लबालब
अनोखा रिश्ता!
भाषा,जाति औ रूप
एक है होता
फिर भी जाने क्यों न
मिलता ऐसा
इंसानों के बीच ये
अनोखा प्यारा रिश्ता।
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Monday, May 4, 2015
चस्का चाट का
साधना मदान
सड़क पर कचरा व ट्रेफ़िक रुकेगा
कब तक
सड़क पर रसोई पकती है,
भला ऐसी रोटी भी कभी पचती
है?
बाहर जाकर खाना और पचाना
स्वाद के साथ आलस भी है
बहाना
यहाँ वहाँ कोई सड़क के पास
बाग के साथ, दुकान के आगे, स्कूल के पीछे
आखिर गंदगी का ये अम्बार लगेगा
कब तक?
सस्ता खाना और स्वाद का चटखारा
नुक्कड़ पर बिकेगा कब तक?
भक्ति भाव व दान के नाम पर
भंडारा बँटेगा कब तक?
खाया लंगर,लगाया भंडारा
फिर पत्तल के नाम पर
थर्माकोल के कचरे का अम्बार
लगेगा कब तक?
ऐसे ही प्रदूषण की धूल में
कचरे का ज़हर फैलेगा कब तक?
ऐसे ही सड़क पर कचरा बिखरेगा
कब तक?
कब तक?आख़िर कब तक?
इसका जवाब है हमारे और सरकार
के पास
इक दूसरे की ही हम अब बनेंगे
आस
नहीं लेंगे जंक फूड की बास
वरना फ़ास्टफ़ूड ही करेगा
हमारे स्वास्थ्य का नाश
न लार टपकाएँ, न चटखारे लें
तभी स्वच्छ खानपान पर बढ़ेगा
विश्वास
स्वाद और साथ साथ चाट के
मज़े को
हम भी हैं स्वीकारते
जनता के साथ सरकार को भी
हम जगाते
सरकार सफाई की करेगी जब
सख्ती
शुद्ध भोजन की पौष्टिकता
बनेगी हमारी शक्ति
निश्चित स्थान व समय की
जब
इन खोमचे वालों पर लगेगी
पाबंदी
बिखेरना नहीं समेटना होगा
तब ज़रूरी
अन्न और मन की पवित्रता
से
जुड़ जाएगा व्यक्ति
तो चाट का चटखारा भी चलता
रहेगा
गुरुद्वारे और मंदिर के
परिसर में ही
भंडारा व लंगर भी बँटता
रहेगा
तभी लगेगा जीभ के स्वाद
का सही तड़का
तभी हटेगा यहाँ वहाँ से गंदगी
का मलबा
तभी दिखेगा सफ़ाई का जलवा
तभी बचेगा शुद्ध पर्यावरण ।
-0-
Saturday, May 2, 2015
ज़िन्दगी तो इक सफ़र
1-डॉ
सुधेश
क्या पता कब बैठ जाए तन ।
ज़िन्दगी तो इक सफ़र से कम नहीं
अनमना चलना पड़ेगा पाँव को ,
राही भटक ले सारे विश्व भर में
लौट आना ही पड़ेगा गाँव को ।
संकल्प के ऊँचे क़िलों को जीतना
है
इन हड्डियों में समाये कितनी थकन
।
रोज़ सपने बिन बुलाये अतिथि से
आ धमकते द्वार पर मेरे सवेरे
उन को टूटना ही था अगर आख़िर
क्यों लगाये मेरे नयन में डेरे ।
फिर भी देखता रंगीन सपने नित
क्या पता मन मीत से फिर हो मिलन ।
पर्वत चोटियाँ देखो बुलाती हैं
हरी घाटी गूंजती है गीत से
घृणा के ज्वाला मुखी नित उबलते हैं
सब दिलों को जीतना है प्रीत से ।
मेरे शब्द करते ऊँची घोषणा यह
यहाँ होगा फिर मुहब्बत का चलन ।
-0-
314 सरल अपार्टमैन्ट्स
, द्वारिका , सैक्टर १० ,नई दिल्ली-110075
फ़ोन 09350974120 Email Drsudhesh@gmailcom
-0-
1-मेरा राम तू, मेरा रहीम तू
नीतू शर्मा
![]() |
| नीतू शर्मा |
सुकून के पल मिलें
तेरी चौखट पर
फिरा मैं दर–बदर
बस राहत मिली तेरे दर पर
इस क़ायनात में
तेरा दीदार ही खुशनुमा हैं
तेरे बिना एक खलिश- सी हैं
और हर कोई गुमशुदा सा हैं
मेरी हस्ती है एक तेरे दम से
तेरी रहमत है मुझ पर
महफूज़ हूँ मैं हर ग़म से
बरसी है बरक़त तेरी मुझ पर
मुझे तो रहना है अब तेरी ख़िदमत में
मेरा राम तू, मेरा रहीम तू
मैं तो एक नादान- सा बन्दा हूँ
तू रहनुमा मेरी इस ज़िन्दगी का
मैं तो बस तेरे ही नूर का एक ज़र्रा हूँ ।
है गुजारिश एक तुझसे
ना करना जुदा कभी खुद से
तू ही तो है रब मेरा
नवाजे तू मुझे अपनी नवाजिश से
-0-
नीतू शर्मा:
मैने जनवरी 2015 में मास्टर इन मास कम्युनिकेशन पास किया हैं, जिसमें
मुझे स्वर्ण पदक मिला हैं। । इसके अलावा
मैने पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है ह्यूमन रिर्सोस
मैनेजमेंट में । मुझे लिखना बहुत पसंद हैं ओर मैं दैनिक भास्कर, जयपुर, राजस्थान पत्रिका जयपुर, दैनिक युगपक्ष बीकानेर के लिए लिखती हूँ। मुझे कविताएँ लिखना भी पंसद हैं। इसके अलावा मैं आकाशवाणी
जयपुर में नाटक विभाग में नाटक भी लिखती हूँ ओर इसके साथ साथ आकाशवाणी जयपुर के
युवा कार्यक्रम युववाणी में कैजुअल एंकर का काम भी करती हूँ।
नीतू शर्मा, 1916, खेजड़ों का रास्ता, चाँदपोल बाजार, जयपुर 302001
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