पथ के साथी

Sunday, August 16, 2015

मन -देहरी



1-कमला निखुर्पा

1
जब भी बिखरा
बाहर नीम अन्धेरा।
नेह से भरा
मेरे नैनों का दिया।
जल उठी फिर से
तेरी यादों की बाती
जगमग हुई
मन -देहरी।
-0-
2-रामेश्वर काम्बोज हिनांशु
1
तेरी मुस्कान ने सींचा
जीवन का हर उजेरा
कि हारकर मुँह छुपा भागा
घेरे था जो अँधेरा ।
मन को जब-जब तुमने छुआ
हर छुअन बन गई दुआ।
यादें तेरी आरती के
दीपक- सी जलती रहीं,
सँजोकर तुम्हें प्राण -सी
युगों तक पलती रहीं।
पावन उर में क्या बसा!
मैं सारे सुख पा गया।
जब-जब गंगा नहाना था
द्वार तुम्हारे आ गया ।
-0-

3-गुंजन अग्रवाल

1
भजो सदा अनादि नाम शक्ति रूप वन्दना ।
हरो त्रिलोक नाथ क्लेश कष्ट दुःख क्रंदना ।।
वृषांक देह नीलकण्ठ शुभ्रता उपासना ।
सदा करो कृपा प्रभो करूँ अनंत अर्चना ।।
2
त्रिशूल हाथ रुद्रदेव उग्र रूप क्यों धरे ।
नमो नमामि शक्तिनाथ वंदना सदा करें ।।
बिसारि भूल भक्त देव पाप ताप हो हरें ।
अनंत रौद्र रूप देख दैत्य है सभी डरें ।।
3
अनंग सर्वशक्तिमान कंठ सर्प है सजे ।
त्रिनेत्र रूप माथ  चंद्र गंग धार है धजे ।।
त्रिशूल हाथ वामअंग अम्बिका-हिये सजे ।
उपासना करे अनाथ भक्त मन्त्र है भजें ।।
-0-


4-अनिता मण्डा

ये गेहूँ की बालियाँ
बाजरे के सिट्टे
दुआ में उठे हुए
जमीं के हाथ जैसे ....
औलाद अगर
भूखी हो तो
माँ को नींद
नहीं आती है....
-0-

Friday, August 14, 2015

जय जनतंत्र हमारा !



डॉ ज्योत्स्ना शर्मा
जी पी खन्ना के सौजन्य से
 कण-कण मुग्ध करे मन-मानस
बहे प्रेम की धारा !
जय जनतंत्र हमारा !  जय जनतंत्र हमारा !

उन्नत मस्तक शिखर हिमालय
मात वैष्णों ,अमर शिवालय
सुंदर झील, नदी-नद न्यारे
श्री ,कश्मीर सभी को प्यारे
हिम कण बरसें, कहीं मोहता
फूलों भरा शिकारा
जय जनतंत्र हमारा ! जय जनतंत्र हमारा !

फूलों की घाटी मन भावन
सागर तीर्थ सुपूजित पावन
राम ,कृष्ण से धन्य धरा है
बुद्ध ,विवेक ,महावीरा है
पाठ अहिंसा का देकर फिर
अप्पो दीप पुकारा
जय जनतंत्र हमारा ! जय जनतंत्र हमारा !

गाँधी और सुभाष वीर ने
सुख ,बिस्मिल,आज़ाद धीर ने
भगत सिंह ,झाँसी की रानी
कितने ही अनगिन बलिदानी
सुत अश्फ़ाक ,अब्दुल हमीद ने
अपना जीवन वारा !
जय जनतंत्र हमारा ! जय जनतंत्र हमारा !

वेदों का विज्ञान न भूलो
भाभा और कलाम न भूलो
दुर्गा ,इन्दिरा और सुनीता
हुई कल्पना परम पुनीता
सकल जगत में धूम ,तिरंगे-
का सम्मान सँवारा !
जय जनतंत्र हमारा ! जय जनतंत्र हमारा !
~~~~~~ॐ~~~~~~
                               

Wednesday, August 12, 2015

स्त्रियाँ



1-स्त्रिया
 डॉ नूतन गैरोला


डॉ०नूतन गैरोला

गुजर जाती हैं अजनबी जंगलों से
अँधेरों में भी
जानवरों के भरोसे
जिनका सत्य वह जानती हैं

सड़क के किनारे तख्ती पर लिखा होता है
सावधान, आगे हाथियों से खतरा है
और वह पार कर चुकी होती हैं जंगल सारा

फिर भी गुजर नहीं पातीं
स्याह रात में सड़कों और बस्तियों के बीच से
काँपती है रूह उनकी
कि
तख्तियाँ
उनके विश्वास की सड़क पर
लाल रंग से जड़ी जा चुकी हैं
यह कि
सावधान! यहाँ आदमियों से खतरा है
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डॉ नूतन गैरोला:  चिकित्सक (स्त्री रोग विशेषज्ञ), समाजसेवी , लेखिका और सहृदय कवयित्री हैं। हिन्दी हाइकु और त्रिवेणी से भी जुड़ी हैं। गायन और नृत्य से भी लगाव। पर्वतारोहण जैसी गतिविधियों में भी भाग लेती रही हैं। उदारमना नूतन  पति के साथ मिल कर पहाड़ों में दूरस्थ क्षेत्रों में नि:शुल्क स्वास्थ -शिविर लगाती रही  हैं।  अब सामाजिक संस्था धाद के साथ जुड़कर पहाड़ ( उत्तराखंड ) से जुड़े कई मुद्दों पर परोक्ष -अपरोक्ष रूप से ( अपने नाम के प्रचार से कोसों दूर)काम करती हैं। पत्र पत्रिकाओं में कुछ रचनाओं का प्रकाशन.
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2-निरुत्तर
सविता अग्रवाल 'सवि'

जब जब तुमने प्रश्न किये
मेरे मुख से  स्वतः ही
उन के उत्तर निकले
परन्तु हर प्रश्न से
एक नए प्रश्न का जन्म हुआ
तुम प्रश्न करते गए
मैं उत्तर देती गई
यही क्रम बहुत देर तक चला
प्रश्नों की एक बाढ़
मेरे मस्तिष्क में आ गई
और मैं स्वयं उसमें
डूबने- सी लगी
अपने को उस भँवर से
निकालने की खातिर
प्रश्न को प्रश्न ही रहने दो
कोई उत्तर न दो ,सोच कर
मैं निरुत्तर हो गई |
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