पथ के साथी

Tuesday, April 21, 2009

Gujju Bhai:Mahavir Singh

BILL GATES organized an enormous session to recruit a new Chairman for
Microsoft Europe.

5000 candidates assembled in a large room. One candidate is Kantibhai Shah.

Bill Gates:  Thank you for coming. Those who do not know JAVA may leave.
2000 people left the room.

Kantibhai says to himself, 'I do not know JAVA but I have nothing to lose
if I stay. I'll  give it a try'

Bill Gates: Candidates who never had experience of managing more than  100 people may leave.
2000 people left the room.

Kantibhai says to himself  ' I never managed anybody by myself but I have
nothing to lose if I stay. What can happen to me?' So he stays.

Bill Gates: Candidates who do not have management diplomas may leave.
500 people left the room.

Kantibhai says to himself, 'I left school at 15 but what have I got to
lose?' So he stays in the room.

Lastly, Bill Gates asked the candidates who do not speak Serbo - Croat to leave.
498 people left the room.

Kantibhai says to himself, ' I do not speak one word of Serbo - Croat but
what do I have to lose?' So he stays and finds himself with one other candidate.
Everyone else has gone.

Bill Gates joined them and said 'Apparently you are the only two candidates
who speak Serbo - Croat, so I'd now like to hear you have a  conversation
together in that language.'

Calmly, Kantibhai turns to the other candidate and says...... 'kem chho?'

The other candidate answers
   .........   'ek dam majama...'
  
Ha...Ha..Ha..!!!

Mahavir Singh" <singhmahabir@yahoo.co.in

Tax Structure in India.... Funny but true

Tax Structure in India
.... Funny but true
MAHAVIR SINGH
Question 1. : What are you doing?
Ans. : Business.
Tax : PAY PROFESSIONAL TAX!

Question 2 : What are you doing in Business?
Ans. : Selling the Goods.
Tax : PAY SALES TAX!!

Question 3 : From where are you getting Goods?
Ans.... : From other State/Abroad
Tax : PAY CENTRAL SALES TAX, CUSTOM DUTY & OCTROI!

Question 4 : What are you getting in Selling Goods?
Ans. : Profit.
Tax : PAY INCOME TAX!

Question 5: How do you distribute profit ?
Ans : By way of
dividend
Tax
: PAY DIVIDEND DISTRIBUTION TAX

Question 6 : Where you Manufacturing the Goods?
Ans. : Factory.
Tax : PAY EXCISE DUTY!

Question 7 : Do you have Office / Warehouse / Factory?
Ans. : Yes
Tax : PAY MUNICIPAL & FIRE TAX!

Question 8 : Do you have Staff?
Ans. : Yes
Tax : PAY STAFF PROFESSIONAL TAX!

Question 9 : Doing business in Millions?
Ans. : Yes  -- Tax : PAY TURNOVER TAX!
Ans : No -- Tax : Then pay Minimum Alternate Tax

Question 10 : Are you taking out over 25,000 Cash from Bank?
Ans. : Yes, for Salary.
Tax : PAY CASH HANDLING TAX!

Question 11 : Where are you taking your client for Lunch & Dinner?
Ans. : Hotel
Tax : PAY FOOD & ENTERTAINMENT TAX!

Question 12 : Are you going Out of Station for Business?
Ans. : Yes
Tax : PAY FRINGE BENEFIT TAX!

Question 13 : Have you taken or given any Service / (s)?
Ans. : Yes
Tax : PAY SERVICE TAX!

Question 14 : How come you got such a Big Amount?
Ans. : Gift on birthday.
Tax : PAY GIFT TAX!

Question 15.: Do you have any Wealth?
Ans. : Yes
Tax : PAY WEALTH TAX!

Question 16 : To reduce Tension, for entertainment, where are you going?
Ans. : Cinema or Resort.
Tax : PAY ENTERTAINMENT TAX!

Question 17 : Have you purchased House?
Ans. : Yes
Tax : PAY STAMP DUTY & REGISTRATION FEE !

Question 18 : How you Travel?
Ans. : Bus
Tax : PAY SURCHARGE!

Question 19.: Any Additional Tax?
Ans. : Yes
Tax : PAY EDUCATIONAL, ADDITIONAL EDUCATIONAL & SURCHARGE ON ALL THE
CENTRAL GOVT.'s TAX !!!
 
Question 20: Delayed any time Paying Any Tax?
Ans. : Yes
Tax : PAY INTEREST & PENALTY!

21) INDIAN : Can I die now??
Ans :: Wait we are about to launch the funeral tax !!!

Friday, April 17, 2009

जूते और वोट



-रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
जूते
जूते में गुन बहुत से, सदा राखियो संग ।
गुण्डे नेता हों जहाँ , वहाँ दिखाए रंग ॥

वहाँ दिखाए रंग,झपट  दुष्टों को मारे ।
यह घमण्ड का भूत , सिर से तुरन्त उतारे ॥

इसका जोड़ न तोड़ सभी कुछ इसके बूते ।
परमाणु से भारी , पड़ते पाँव के जूते ॥
>>>>>>>>>>>>> 
वोट

लोकतन्त्र में वोट है , बहुत बड़ा हथियार ।
यही इन्द्र का बज्र है ,  करे अमोघ प्रहार ॥
करे अमोघ प्रहार ,टिकते न गाली जूते ।
सदा बदलता तंत्र , केवल  इसी  के बूते ॥
गाली जूते छोड़ , इसी को सब अपनाओ 
वोट -चोट का मन्त्र ,सभीको जा बतलाओ ।।

Tuesday, April 7, 2009

Heaven and Hell:Mahavir Singh












A holy man was having a conversation with God one day and said,
'God, I would like to know what Heaven and Hell are like.'

God led the holy man to two doors.

He opened one of the doors and the holy man looked in.
In the middle of the room was a large round table. In the middle of the table was a large pot of stew, which smelled delicious and made the holy man's mouth water.
The people sitting around the table were thin and sickly.. They appeared to be famished.
They were holding spoons with very long handles, that were strapped to their arms and each found it impossible to reach into the pot of stew and take a spoonful.
But because the handle was longer than their arms, they could not get the spoons back into their mouths.
The holy man shuddered at the sight of their misery and suffering.
God said, 'You have seen Hell.'

They went to the next room and opened the door. It was exactly the same as the first one.
There was the large round table with the large pot of stew which made the holy man's mouth water.
The people were equipped with the same long-handled spoons, but here the people were well nourished and plump, laughing and talking. The holy man said, 'I don't understand..'
It is simple,' said God . 'It requires but one skill.
You see they have learned to feed each other, while the greedy think only of themselves.'

Presented by


Mahavir Singh


Tuesday, March 24, 2009

मुस्कान तुम्हारी


[आगे बढ़ो तुम पार अँधेरे के ।
दो क़दम दूर हैं द्वार सवेरे के॥]

मुस्कान तुम्हारीपीछे तो केवल छाया है
यही तुम्हारा सरमाया है ।

तुम अपनों को ढूँढ़ रहे हो
कोई साथ नहीं आया है ।

देखी है मुस्कान तुम्हारी
सब कुछ आँसू से पाया है ।

जिसको तुमने गीत कहा था
चुपके रो-रोकर गाया है ।

तुम भी बाज नहीं आते हो
जी भरके धोखा खाया है ।

आशीषों की वर्षा करके
केवल ज़हर तुम्हें भाया है

अपनों का तो सपना पाला
गैरों ने ही अपनाया है ।

-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
19 मार्च 2009

हमारे संस्कार ( एक घरेलू महिला की डायरी)



हमारे संस्कार ( एक घरेलू महिला की डायरी)


सविता यशपाल



(1) माता पिता के विचार



(2)अच्छे विचार



(3)मन को वश में करना सीखें



(4)चेहेरे पर हँसीखुशी रखें



(5) अपने विचारों को सशक्त बनाएँ



(6) हमेशा तनावमुक्त रहिए



(7) मातापिता को भूलना नही चाहिए






1-माता पिता के विचार



मातापिता अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देते है। बच्चा जैसा देखता है उसके मन में वैसे ही चित्र अंकित हो जाते है। बच्चे ईश्वर का रूप होते है अच्छे विचार वाले मातापिता भी पिछले जन्म के कर्मो से मिलते है क्यों कुछ अब के कर्म करने से मिलते है दो को मिला कर योग्य बनता है। अच्छे संस्कार वाले मातापिता बच्चों को मिलते है यही ईश्वर की माया है। मातापिता चाहते है कि हमारे बच्चे सुभाषचन्द्र बोस और श्रवण कुमार जैसे महापुरुष हो। विनम्रता, मीठी वाणी, ईमानदारी, सहनशीलता सबके प्रति सद्भावना और स्व स्वीकृत अनुशासन ही मनुष्य जीवन को गौरवशाली बनाता है। आप यह गौरव पा सकें तो आपके जीवन वाटिका भी हरीभरी एवं सुव्यवस्थित हो जायेगी।


2-अच्छे विचार


हमारे विचार हमारे जीवन पर प्रभाव डालते है। यह विचार मन में कैदी बनकर तो नही रह सकते यह तो चलतीफिरती माया है। जो कभी एक जगह पर नही टिक पाती


इन विचारों के दो रूप है:-


1-दुख 2-सुख


आपके विचारों का प्रभाव आपकी बोल चाल पर भी पडता है। आप जो कुछ भी बोलते है, उसे अपनी इच्छा से नही विचारों की इच्छा से बोलते है। सद् विचार ही आपकी इच्छाओं पर अपना प्रभाव डालते हैं। आपकी बोल चाल से ही आपकी बुद्वि का अन्दाजा लगाया जा सकता है। आपके विचार से यह भी पता चलना है, कि आप शक्तिमान् हो अथवा दुर्बल । आप कमजोर दिल के है। या बहादुर दिल के बुरा आदमी जिसके विचार गन्दे हो उससे न जाने कितने लोगों के विचार गन्दें होते है, भले ही वह अपने अपने मुँह से कुछ न बोले किन्तु उनकी आँखों से हमे उसके विचारों का पता चल जाएगा। उसके चेहरे पर छाए हुए बुराई की छाया हमें साफ नजर आएगी । हमारा मन अन्दर से अपने आप बोल उठेगा-यह आदमी पापी है।धोखे बाज है।झूठा है।


यदि हमारे विचार सुविकसित है तो हमारी जबान पर मिठास होगी। यदि हमारा मन शांत हो तो एक नयी शक्ति पैदा होगी इसमें हमें एक नया ज्ञान मिलता, नयी सोच मिलती है। इसलिए हमें अपने विचारों को सदा स्वच्छ, उच्च, पवित्र, महान रखना चाहिए। उन्हे हर बुरी वस्तु से दूर रखें,हर बुराई से दूर रखें। कुछ लोग ऐसे विचारों का ही प्रचार करते रहते है, वे जहाँ भी जाते है, आंतक, असफलता और निराशा के विचारों को अपने साथ ले जाते है। यही विचार दूसरे सुखी लोगों पर लाद कर उन्हें भी दु:खी करने का प्रयास करते है। ऐसे लोगों को अपने पास मत आने दीजिए। यदि यह भूल कर आ ही जाये तो इनके पास से स्वयं उठकर चले जाना ही भलाई है। भला करो, तो मन को शान्ति मिलेगी, शांत मन तो ईश्वर को पा लेता है।


अच्छा कर्म करने से अच्छाई मिलेगी, लोग आपका आदर करेगे। सबसे प्यार करोगे तो सब प्यार देगे। सबकी इज्जत करोगे तो सब इज्जत करेगें। इससे आप सफल इन्सान बन जायेगे।


आपके घर में सुख होगा


आपकी संन्तान सुखी होगी


अपने ऊँचे आदर्श विचारों से आप संसार का मन जीत सकते है।



3-मन को वश में करना सीखें



इंसान का मन चंचल है तथा प्रत्येक समय भटकता रहता है। इस बात को सभी लोग जानते है अगर आप इसें वश में नही करते तो अवश्य ही धोखा खाएँगे। यदि आप में आत्मविश्वास है, यदि आपको अपनी बुद्वि पर पूरा भरोसा है तो ऐसे संकट के समय वही बुद्वि आपके अवश्य काम आयेगी शक्तिशाली जो नही होता जो मुसीबतों के समय ही अपनी शक्ति दिखाता है बल्कि वह है हालात के अनुसार ही कार्ययोग्यता तथा सफलता की क्षमता को सबके सामने प्रकट करके दिखाए, दिन तो आतेजाते है। परन्तु हमारा जीवन हमें फिर कहाँ मिलेगा जो कि चीज नाशवान है। उसकी चिन्ता क्यों? हमें यह सोचना और मानना चाहिए। आओं आज मौज उडाए, इस विश्व के सम्पूर्ण सुख हमारे है, हमारे चारों तरफ स्वादिष्ट से स्वादिष्ट भोजन फलफूल एवं न जाने क्या कुछ पड़ा है। आज के दिन हम अच्छे से अच्छा खाना खाएँगे, अच्छे वस्त्र पहनेगे, मौज उडाये, मस्ती मारे, झूमे, नाचे, गायें अपने जीवन को सुखी बनायें, बस इस तरह की बातों से आपका यह दिन सुखी दिन होगा। आप अवश्य ही अपने जीवन को सुखी बनाने की कल्पना करें। खुशी में अच्छा काम करता है। उठिए, कोई ऐसा काम कर डालिए जो आपकी चिन्ताओं को मिटा दे। इस चिन्ता को हमेशा के लिए अपने मन से बाहर निकाल किसी ऐसे स्थान पर फेंक दीजिए जहाँ से मुडकर यह आप के पास न आ सके, अगर आप वास्तव में ही अपनी इन चिन्ताओं से छुटकारा पाना चाहते है:


(1) क्रोध


(2) चिन्ता


(3) भय


(4) चिड़चिड़ापन


(5) निराशा


(6) एक दूसरे को देखकर जलना


(7) मन की डाँवाडोल हालत(मन की बिगडी हालत)


इन सातों शत्रुओं को अपने पास न आने दें, यही सब आपके सुख को नष्ट करने वाले है। यही आपकी प्रगति के मार्ग की बाधाएँ हैं। यही सब आपकी चिन्ता के सागर में डुबोकर आपके शरीर में विषैले पदार्थ भर देते है।


भाग्य को बनाने के लिए भी साहस की आवश्यकता पड़ती है ईश्वर ने तो यह आपके भाग्य में लिख दिया कि आपको दो समय की रोटी मिलेगी, आप उस रोटी की खोज करें, उसे पाने के लिए मेहनत करें, आटा गूँथे, चूल्हा जलायें, सब्जी बनायें, फिर रोटी खायें।


भगवान ने यदि यह सब कुछ भाग्य में लिख दिया है तो आप उसे पाने के लिए परिश्रम तो करेंगे ही। इन सम्पूर्ण कार्यो के लिए आपको अपने भीतर एक शक्तिशाली इच्छा शक्ति को जन्म देना होगा तथा साथ ही दृढ़ निश्चय करके गुस्सा, चिडचिडापन, दूसरों को देखकर, जलन, निराश, चिन्ता को अपने शत्रु समझकर जीवन से दूर कर दीजिए, उनका अन्तिम संस्कार कर दीजिए ताकि आप अपने सामान्य कार्यो को आराम पूरा कर सकें। जो लोग दूसरों को देखकर नही जलते, वही अपने कार्यो में सफल होते है। इसे कहते हैं सच्ची लगन सच्ची लगन से तो आदमी प्रभु को पा सकता है। तो फिर आप की मनोकामना पूरी हो सकती है आप अपनी इच्छा शक्ति आत्मविश्वास और लगन को एक साथ जोड़कर चलिए तो फिर देखिये आप कैसे महान बनते है। आपको सुख प्राप्त होगें दु:खों के समय अपने आप को सुधार कर अपने में उनका मुकाबला करने की शक्ति तथा योग्यता पैदा करना यही अच्छे गुण है। इससे ही आप सफल प्राणी माने जाएँगे। यही मनोवृत्ति आपको आपके खोए हुए सुख वापस ला देगी, आप सुखी होंगे। आपका परिवार सुखी होगा। मानव का स्वभाव होता है कि वह अपनी गलतियों और कमजोरियों को छुपाता है वह सदा दूसरों के सामने सिद्व करने की कोशिश करता है वह जो कुछ है दूसरा नही, यह भावना उसमें अहंभाव पैदा करती है। अहंकार को जन्म देती है। उसके कार्य उसको सफलता का आकलन तो खुद व खुद सामने आताजाता है। उसकी दिन प्रतिदिन की प्रगति खुद ही लोगों के सामने आती चली जाती है। सि‍र्फ़ अंहकार में भरकर अपने को श्रेष्ट साबित करने की चेष्टा करने वाला कभी भी सफल सिद्व नही होता। विजय की ओर बढ़ना तो सच्चे मन से अपनी योग्यता और क्षमता का आकलन करना चाहिए। अंहकार से दूर रहकर विनयशील बनिए । सफलता और विजय के द्वार आप ही आप खुलते चलें जाएँगे।


Monday, January 26, 2009

खून के रिश्ते ।


खून ही पीते रहे ये खून के रिश्ते ।
सदा ही रीते रहे ये खून के रिश्ते ॥

जोंक भी जीती सदा सबको पता कैसे ।
इसी तरह जीते रहे ये खून के रिश्ते ॥

घाव जो खाए भला कब ठीक वे होते ।
शूल से सीते रहे ये खून के रिश्ते ॥

वे समझते हैं हमें रोना नहीं आता ।
अश्क में बीते रहे ये खून के रिश्ते ॥

-रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

Wednesday, January 21, 2009

छन्द कहीं नहीं गया था

छन्द कहीं नहीं गया था
छन्द कहीं नहीं गया था ,जो वापस आ गया हो । हाँ इतना ज़रूर हुआ है कि छन्दहीनता (छन्दमुक्तता नहीं)ने हिन्दी पाठकों के मन में कविता के प्रति वितृष्णा भर दी है ।स्थापित कवि अपनी घटिया कविता(बकवास कहना ज़्यादा सार्थक होगा)से कविता के सही पाठकों को दूर खदेड़ने का काम कर रहे हैं। नई दुनिया की 18 जनवरी की पत्रिका देख लीजिए ।इस अंक में अरुण कमल जी की एक अच्छी कविता 'इच्छा थी' देखी जा सकती है ।इसी पृष्ठ पर दूसरी कविता ? 'आराम कुर्सी' भी है ,जिसे पढ़कर लगता है कि कवि के पास लिखने के लिए कुछ नहीं बचा है। अरुण कमल की ज़गह कोई और नाम होता तो कविता रद्दी की टोकरी में मिलती । पाठ्यक्रम में भी इस तरह की कविताएँ बहुत मिल जाएँगी ;जिन्होंने कविता के पाठकों को बहुत दूर कर दिया है । अच्छी कविता में लय स्वत: आती है, चाहे वह छन्दयुक्त हो चाहे छन्दमुक्त ।छन्द के नाम पर भी तुक्कड़ कवि बहुत कुछ ईंट-पत्थर पाठकों के सिर पर पटकते रहते हैं। बेहूदा लिखने वालों ने प्रकाशकों को भी इसीलिए कविता की पुस्तकों के प्रकाशन से डरा दिया है । आज भी उतम रचनाकारों की कमी नहीं ;पर उन्हें उनके अनुरूप स्थान नहीं मिल पाता है ।
रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

Saturday, January 10, 2009

अधिकारियों की हड़ताल

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
अधिकारियों की एक हड़ताल ने पूरे देश को बन्धक बना लिया है । करोड़ों लोगों को हैरान और परेशान करने वाले ये अधिकारी लगता है देश और जनता दोनों दे भी ऊपर हो गए हैं । ऑटोचालक से लेकर दफ़्तर जाने वाले सभी कर्मचारी परेशान ,एम्बुलेंस से अस्पताल जाने वाले परेशान : अधिकारियों का वेतन जो नहीं बढ़ा । इस तरह के आतंकवादी अधिकारी अपने वेतन को बढ़ाने के लिए पूरे देश को ही ब्लैकमेल करने पर तुले हैं ।इन्हें जो भी दण्ड दिया जाए वह कम है । क्या इन्हें रोटी के लाले पड़ गए हैं ? यदि नहीं तो इन्हें किसी की रोटी से खेलने का अधिकार किसने दिया ? क्या ये उन रोटी से वंचित रहने वाले ऑटोचालकों या अन्य कर्मियों की रोज़ी का खमियाज़ा भुगतेंगे ? दफ़्तरों के नुकसान का हिसाब-किताब देंगे ? नहीं ,तो क्यों नहीं ?इन्हें इनका प्रस्तावित वेतन देकर देश की सीमा पर भेज देना चाहिए तब इनको मालूम होगा कि नौकरी क्या चीज़ है । वातानुकूलित कक्ष में बैठकर ऐसा मज़ाक करना आसान लगता है । इन अड़ियल अधिकारियों के साथ वही व्यवहार होना चाहिए जो आतंकवादियों के साथ होता है ,क्योंकि इनका व्यवहार उनसे भी बदतर है ।
इस देश में ऐसे भी अधिकारी हैं ,जिनकी केवल सालाना वेतन-वृद्धि 36 लाख तक या ज़्यादा भी है ; जबकि भारत के महामहिम राष्ट्रपति जी का वार्षिक वेतन भी इतना नहीं है । ।आखिर जनता के पैसे पर ये लोग कब तक मौज़ करते रहेंगे ?

भाषा के बल पर उन्नति

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
अंग्रेज़ी को राजनीति का पर्याय समझने वाले लोग आम आदमी से कितनी दूर हैं ,इसके लिए प्रमाण की ज़रूरत नहीं । किसी भाषा विशेष को जानने से राजनीति या कोई चीज़ खुद चलकर नहीं आ जाएगी ।पुराने कांग्रेसी कामराज कौन सी भाषा पढ़े थे ?इन्दिरा जी ,शास्त्री जी और बाजपेयी जी किस भाषा के कारण जनमानस से जुड़े रहे ? लालू जी और राबड़ी को मत भूल जाइये । इनकी ठेठ भाषा कितनी ताकतवर है ? सब जानते हैं ।एक अरब से अधिक संख्या वाला देश अगर अंग्रेजी के बिना बेवकूफ़ माना जा रहा है तो यह गरीब लोगों के पैसे पर आराम करने वालों की गहरी साजिश है ।राजभाषा हिन्दी में काम करने वालों के रास्ते में कौन रुकावट डाल रहा है ? विदेशी शक्तियाँ नही, वरन् वे भारतीय हैं ;जो मन से आज भी गुलामी ओढ़े हुए हैं । अंग्रेज़ी की खाल उतार देंगे तो असलियत का पता चल जाएगा । चुनाव के समय अंग्रेज़ी बोलकर वोट माँगे और जीत जाए ;है कोई ऐसा सूरमा ? यदि नहीं है तो इस देश के लोगों को बेवकूफ़ मत बनाइए । मोर्चे पर छाती खोलकर गोलियाँ खाने वाले कौन हैं? वे भारतीय भाषाओं की माटी से जुड़े लोग हैं ।जिसे अपनी भाषा( किसी भी भारतीय भाषा पर ) गर्व नहीं है ,उसे क्या कहा जाए ? जो जितनी भाषा जान ले उतना ही अच्छा है ;लेकिन हिन्दी जाननेवाला होने से वह दोयम दर्ज़े का नागरिक नहीं हो जाएगा । भाषा की हीन ग्रन्थि का ऐसा प्रभाव केवल भारत में ही देखने को मिलता है । रूस ,चीन ,जापान ,फ़्रांस आदि देशों ने किस भाषा के बल पर उन्नति की ?अमेरिका की अंग्रेज़ी का प्रतिफल इराक ,अफ़गानिस्तान तथा अन्य देश ही नहीं भुगत रहे हैं ,अमेरिका वाले भी भुगत रहे हैं । जितनी चाहे अंग्रेज़ी झाड़ो ,बुश जैसे महानुभाव अपनी बिल्ली का नाम ‘इण्डिया’ रखने से बाज नहीं आएँगे । हम अभी इतने गए-बीते नहीं हो पाए कि अपने कुत्ते का नाम बुश रखने लगें ।

Monday, December 15, 2008

अविश्वस्ते न विश्वसेत्

अविश्वस्ते न विश्वसेत्

     पाकिस्तान पर भरोसा न कर हमें अपनी कार्यनीति व्यावहारिक और सुदृढ़ बनानी चाहिए ।ज़रदारी जी सुबह जो बयान ज़ारी करते हैं ,शाम होने तक उस से मुकर जाते हैं ।वे वहाँ की आम जनता के प्रति ज़वाबदेह न होकर सेना और आइ एस आई के प्रति ज़्यादा ज़वाबदेह हैं ।लगता है आज न सेना उनका हुक़्म मानने को तैयार है और न आई एस आई ।आतंकवादियों का और इस गुप्तचर शाखा का नाखून और मांस का रिश्ता है ।ऐसे हालात में ये इन तीनों में से किसी के भी विरुद्ध  नहीं जा सकते ।जिस दिन विरोध में जाएँगे ,उस दिन किसी दूसरे देश में जाकर ठिकाना ढूँढ़ना पड़ेगा;पाकिस्तान का अतीत इसी बात की पुष्टि करता है। ऐसी कौन -सी लोकतान्त्रिक सरकार रही है ,जिसने फ़ौज़ के सामने घुटने न टेके हों ?कोई माँ अपने पोषित बच्चे को मार सकती है क्या?फ़िर हम पाकिस्तान से कैसे उम्मीद लगाए हुए हैं कि वह अपने आतंकी बच्चे को मारे ।क्या पालकर पहलवान इसलिए बनाया था कि  भारत के कहने पर उसे मार दे ?पाकिस्तान का फ़ौजी शासक यह काम नहीं कर पाया तो बेचारे ज़रदारी क्या खाकर यह काम   करेंगे ?हम भारतवासी इस ग़लतफ़हमी से निकलें और खुद कठोर एवं कूटनीतिक क़दम उठाएँ

- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

Wednesday, December 3, 2008

चिकौटियाँ



1-समय का सदुपयोग

रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं तो समय का सदुपयोग सीखिए।घर में अधिक से समय बीवी- बच्चों के साथ बिताइए । नाते- रिश्तेदरों से बात करना हो तो दफ़्तर के समय में बात कर लीजिए। दफ़्तर का ही फोन मिल जाए तो फिर क्या कहना जीभर बात कीजिए ।आपके सामने जो अपने काम के लिए सिर पर सवार है ,उसकी चिन्ता मत कीजिए ।वह तो पूरे दिन को बर्बाद करने के लिए आया है । इन्तज़ार कराकर उसकी सहायता कीजिए ।उसको देखकर भी अनदेखा कर दीजिए । एक बार में ही किसी का काम निबटा देंगे तो वह दुबारा दफ़्तर की ख़ाक छानने क्यों आएगा ?सर्दी का मौसम है, कुछ समय धूप में खड़े होकर स्वास्थ्य लाभ कीजिए । यही बचा-खुचा-नुचा स्वास्थ्य रिटायरमेण्ट के बाद काम आएगा।

2-बुलेट प्रूफ़ जैकेट
रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

आजकल चिन्ता है- निकम्मी बुलेट प्रूफ़ जैकेट की;जिन्हें पहनने के मुगालते में हमारे बहादुर पुलिसवाले शहीद हो गए । यह भ्रम मत रखिए कि हमारे नेता बहादुर नहीं हैं, वे निर्भय होकर नहीं रह सकते हैं ।यदि विश्वास न हो तो ये निकम्मी बुलेट प्रूफ़ जैकेट उन्हें पहना दीजिए ।पुलिसवालों के लिए नई ला दीजिए । नेतालोग देश के लिए क्या इतना त्याग नहीं कर सकते ? ये बहुत कुछ खा और पचा सकते हैं ।दो टके की गोली इनका बाल भी बाँका नहीं कर सकती ।शुभ कार्य में देरी क्या? हमारे बयान-बाँकुरे इस पुनीत कार्य में सबसे आगे रहेंगे । आदमी का इन्सल्टप्रूफ़ होना बहुत बड़ी ताकत है।इस ताकत के आगे बुलेट प्रूफ़ जैकेट की क्या औक़ात !
3 दिसम्बर 2008

Tuesday, December 2, 2008

रूबाइयाँ

:रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
25अपना तो दिल है मस्ताना इकले चलते जाएँगे ।
जलने वाले खूब जलें हम हँसते हैं हम गाएँगे ॥
दुनिया बस्ती बनी ठगों की हम किसको अपना कह दें।
जिसका मन होगा सच्चा हम उसको गले लगाएँगे ॥
26
जब से टूक-टूक हो बिखर गया हूँ ।
तब से और भी अधिक निखर गया हूँ।
मेरा ये पश्त मुक़द्दर रहा साथ मेरे
उम्मीदें लेकर मैं जिधर गया हूँ॥
27
बचाके दामन तेरी गली से गुज़र गया हूँ ।
यादों का साया रहा साथ मैं जिधर गया हूँ ॥
देना था सिला क्या चाँद यही मेरी वफ़ा का ।
तेरे दिल से अब न्शे की तरह उतर गया हूँ ॥
28
इस दिल पे तेरे क़दमों के निशान बाक़ी हैं।
महकते हुए ग़ेसुओं की पहचान बाक़ी है॥
हमेंचले गए छोड़कर तुम तो सरे-राह ।
फिर भी तुझे पा लेने के अरमान बाक़ी हैं ॥

29
रहती हैं हर वक़्त नशे में चूर आँखें।
कलेजे तक उतर जाती ये बेक़सूर आँखें ॥
खैर माँगो ख़ुदा से अपनी ज़िन्दगी की ।
हसीन क़यामत हैं ये पुरनूर आँखें ॥
30
डूबते हुए को किनारा ही बहुत है ।
अँधेरी रात में तारा ही बहुत है ॥
एक क्या हज़ार जानें लुटा दें तुझपे हम
कजरारी आँखों का इशारा ही बहुत है ॥

31
इन स्याह ग़ेसुओं में पनाह दे दो।
दिल तक पहुँचने की राह दे दो ॥
ताउम्र रहे दिल में तेरी हसरत ।
नादान दिल को वह ग़ुनाह दे दो॥
32
लिख-लिखकर मेरा नाम मिटाने वाले ।
तन्हाई में छुपकर आँसू बहाने वाले ॥
मेरी रुह की बेकली भला तू क्या जाने ।
यादों के निशान नहीं कभी जाने वाले ॥

Sunday, November 16, 2008

राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह का आयोजन







राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह का आयोजन


यहनेशनल बुक ट्र्स्ट इण्डिया द्वारा भारत के विभिन्न नगरों में 14-20 तक राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है।पुस्तक पढ़ने की संस्कृति के उन्नयन के लिए पं नेहरू जी ने 1 अगस्त 1957 में नेशनल बुक ट्र्स्ट इण्डिया की स्थापना की थी नेशनल बुक ट्र्स्ट इण्डिया ने राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह के अन्तर्गत देश के विभिन्न भागों में पुस्तका-विमोचन के साथ-साथ निबन्धप्रतियोगिता,विचार-विमर्श,कवि-दरबार आदि विभिन्न कार्यक्रमा की योजना बनाई है ।इसी सन्दर्भ में नेशनल बुक ट्र्स्ट इण्डिया नेहरू भवन दिल्ली में राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह के अवसर पर विभिन्न माध्यमों के द्वारा कहानी-कथन को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है कार्यक्रम का शुभारम्भ नेशनल बुक ट्र्स्ट इण्डिया के अध्यक्ष प्रो विपिन चन्द्रा जी के द्वारा पुस्तकालय ऑटोमेशन के उद्घाटन से हुआ एक महत्त्वपूर्ण योजना है जो पुस्तक प्रेमियों को जो्ड़ने का काम करेगी ।इसके बाद प्रो चन्द्रा जी ने पोस्टर एवं पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया कहानीकथन सत्र में 6-12 आयु वर्ग के बच्चों के समक्ष चित्रकार जगदीश जोशी,श्रीमती क्षमा शर्मा ,श्रीमती दीपा अग्रवाल ने कहानीकथन के बारे में अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। जोशी जी ने कहाचित्र के हिसाब से कहानी लिखना एक कठिन काम है ,कहानी के विषय पर चित्र बनाना हो तो यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि चित्रों में विविधता बनी रहे ।भारत में प्राय: 16 पृष्ठों की सचित्र पुस्तकों का प्रकाशन हो्ता है ;जिसमें 7-8 चित्रों के लिए जगह मिल पाती है चित्रों का कहानी के विषय के अथ तालमेल होना चाहिए चित्र कथा की सिच्युएशन के अनुसार परिवर्तनशील हों श्रीमती दीपा अग्रवाल ने कहानी का विशेष गुण बतायादूसरों को जोड़ना,संवाद स्थापित करना एवं व्यापक फलक पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान करना ।कहानी शब्दों के माध्यम से एक प्रकार का मानसिक पोषण है।,श्रीमती क्षमा शर्मा ने कहानी के लिए श्रोता की भागीदारी ,उत्सुकता को प्रमुख बताया बच्चों के बीच की कथावस्तु (बस्ता)को आधार बनाकर रोचक कहानी का सूत्रपात किया ।इसी प्रकार –‘एक जंगल थाको केन्द्र में रखकर पक्षी थे ,खिड़की थी, खिड़की से झाँकते बच्चे थे-इस प्रकार कहानी को बच्चों की सहभागिता से आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को समझाया ।वर्तमान परिस्थितियाँ कितनी कटु हो गई हैं कि बच्चों का कोमल मन भी उससे अछूता नहीं रह सका है ।गुड़गाँव के स्कूल के बच्चों द्वारा लिखी गई कहानियों के अन्त (सभी बच्चों ने कहानी का अन्त बम ब्लास्ट से किया था) की समानता पर चिन्ता प्रकट करते हुए कहाहमें हँसते दौड़ते बच्चे चाहिए जो कहानियाँ लिखी जाएँ वे शोषण गरीबी और अन्याय के खिलाफ़ हों अध्यक्ष पद से बोलते हुए प्रो विपिन चन्द्रा जी ने अपने बचपन में सुनी कहानी के माध्यम से जीवन के सकारात्मक पहलू को उभारने पर बल दिया ।श्री मानस रंजन महापात्र ने निदेशक श्रीमती नुज़्हत हसन के प्रति आभार प्रकट किया ;जिन्होंने इस कार्यक्रम को नए स्वरूप में प्रस्तुत करने का परामर्श दिया था ।श्री द्विजेन्द्र कुमार ने कार्य क्रम का संचालन किया दूसरे सत्र में प्रसिद्ध कथाकार श्रीमती सुरेखा पाणंदीकर ने विभिन्न विद्यालयों के छात्रों के सम्मुख रोचक ढग सेराक्षस की लोरीऔरकौन बनेगा राजाकहानियाँ सुनाईं ।इस सत्र में बच्चों ने भी कहानी में सहभागिता की बच्चों के चेहरों पर झलक रहे आत्मविश्वास और प्रसन्नता ने इस सत्र को बहुत रोचकता प्रदान की लाखों में छपने वाले अखबार बीस करोड़ बच्चों को भुलाने में पीछे नहीं हैं। अपठनीयता के वर्तमान संकट में इस तरह के कार्यक्रम कठिन तपिश में फुहार-सा वातवरण प्रदान करते हैं। इस अवसर पर प्रसिद्ध व्यंग्य चित्रकार श्री आबिद सुरती भी मौज़ूद थे ।पुस्तक प्रदर्शनी में पुस्तक महल ,साहित्य अकादमी ,आर्य बुक डिपो ,एन सी आर टी, नेशनल बुक ट्र्स्ट, प्रथम बुक्स रूम टू रीड इंडिया आदि प्रकाशकों ने भाग लिया यह प्रदर्शनी 20 नवम्बर तक रहेगी
प्रस्तुति :- रामेश्वर काम्बोजहिमांशु rdkamboj@gmail.com