पथ के साथी

Saturday, July 18, 2026

1506

 

1. मेघ से मनुहार/ भावना चौधरी 

 


श्याम-वर्ण मेघा सघन

 चीरकर विस्तृत गगन

 दामिनी को साथ लेकर

 गर्जना का नाद लेकर

 न तपन भू पर बचेगी।

 

आगमन हुंकार दे दो

श्रावणी फुहार दे दो

 

यह धरा ऊसर है तुम बिन

 नद स्तर है निम्न तुम बिन

 कितने जोड़े सूखी आँखें 

बाट जोहती रोज दिन गिन

 

तप्त धरती, शुष्क वन हैं 

आस में सूखे नयन हैं

 

तप्त भू, हारे हृदय को

आशा का संचार दे दो 

श्रावणी फुहार दे दो 

तर गला कर दो डगर का 

अंक भर दो सर-सगर का 

आज धरती पर लुटा दो 

कोष संचित वर्ष भर का

फिर मयूरा मन में नाचे

मन प्रणय की पाती बाँचे

इंद्रधनुष के रंग सजाकर

अधरों को मल्हार दे दो।

-0-कोटा, राजस्थान।

 

-0-

2.नदी / सुरभि डागर 

 


कल-कल करती बहती नदी,

जीवन का संगीत सुनाती।

पर्वत की गोदी से निकल,

धरती का शृंगार बढ़ाती॥

 

शीतल जल की निर्मल धारा,

सबकी प्यास सदा बुझाती।

खेतों में हरियाली भरकर,

अन्न की खुशियाँ ले आती॥

 

पथ में चट्टानें हों चाहे,

रुकना उसने कभी न जाना।

संघर्षों से लड़ते-लड़ते,

जीवन का संदेश सुनाना॥

 

पक्षी, वन, उपवन और पशु,

सबका वह जीवनन जाती।

ममता की अविरल धारा-सी,

हर मन में विश्वास जगाती॥

 

आओ हम सब मिलकर इसकी,

निर्मलता का मान बढ़ाएँ।

प्रदूषण से बचा नदियों को,

स्वच्छ धरा का स्वप्न सजाएँ॥

 

कल-कल करती बहती नदी,

प्रकृति का अनुपम उपहार।

जीवन की यह अमृत-धारा,

जग के प्राणों का संचार॥

-0-

3-तलाश /  शिवानी रावत 

 


    ना भूत की, ना भविष्य की 

     ना  तख्त - ओ ताज की 

      मुझे तलाश आज की

        हाँ सच बिके ना

      हाँ झूठ टिके ना

 हाँ दिल से दिल जुड़े हो

 हाँ सुख-दुख में सब

एक दूजे संग खड़े हो 

हाँ रिश्तो में अटूट विश्वास हो 

हाँ प्रेम ,सहयोग, सम्मान का वास हो

 ऐसे सुंदर समाज की 

 मुझे तलाश आज की 

 आपस में हो प्रेम और बढ़े भाईचारा

 सीता - सा धैर्य, राम - सी मर्यादा

 रिश्तो में स्वार्थ कम, हो प्रेम ज्यादा

हाँ अमीरी का रौब न हो

हाँ गरीबी पीड़ित ना हो

हाँ दया ,धर्म क्षमा का भाव हो

  ऐसे आदर्श समाज की

  मुझे तलाश आज की 

हाँ संस्कार ,संस्कृति का प्रसार हो

 हाँ युवा बच्चों में बूढ़े माँ-बाप के प्रति 

प्यार और सत्कार हो 

भले न पूजे कोई भगवान

बस मन में ना हो छल कपट और अभिमान 

हाँ मानवता को से सबका नाता हो 

  ऐसे निर्मल समाज की 

  मुझे तलाश आज की।

-0-

51 comments:

  1. बहुत-बहुत धन्यवाद sir बहुत बहुत आभार आपका 🙏🙏😊

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  2. The poem of my dear friend is very cool and amazing.

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  3. Wow didi❤️🤌

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    1. Thank you 🥰

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    2. "जितनी खूबसूरत आप हैं, उतनी ही खूबसूरत और गहरी आपकी poem होती है। हमेशा यूं ही लिखती रहिए। Proud of you, Di! ✍️🌟"🥰
      Reshma Rawat

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    3. Thank so much 🌸🥰❣️

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  4. Bahut achii kavita likhi hai aapne shivani ji... Bhut achi... Aise hi aage badhte rahiye life mein...

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    1. बहुत बहुत धन्यावाद

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  5. ❣️❣️

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  6. Shalini Yadav18 July, 2026 20:41

    Wishing you bat for your Future keep going Girl!!! Your poem is voice of our life ❤️ Lots of love from LUCKNOW.

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  7. Congratulations 🎉 Shivani 🥳👏

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  8. बहोत अच्छी कविता है 🫀❤

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  9. Bahut sunder 👌👌

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  10. Very Very Nice poem🥰🥰

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  11. बहुत बहुत धन्यावाद

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  12. सुन्दर कविताओं के लिए आप सभी को बहुत बधाई

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    1. धन्यवाद आपका

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  13. अधिकतर साथियों ने टिप्पणी में अपना नाम तक नहीं लिखा।

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  14. उत्कृष्ट सृजन 🌹भावपूर्ण कविताएँ.. 🌹🙏🏻

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  15. तीनों कविताएँ बहुत सुंदर हैं, एक ओर मेघ से पृथ्वी पर आने की मनुहार है, नदी के प्रति आभार है तो दूसरी ओर सुंदर समाज की तलाश है। बहुत अच्छी रचनाओं के लिए आप सभी को हार्दिक बधाई ।सुदर्शन रत्नाकर

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    1. बहुत बहुत धन्यावाद आपका 🌸🙏

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  16. तीनों रचनाकारों ने बहुत सुंदर ढंग से अलग-अलग मनोभावों को कविता में पिरोया है, भावना जी,सुरभि जी और शिवानी को बहुत-बहुत बधाई।

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    1. बहुत बहुत आभार आपका आप सबका प्यार और आशीर्वाद एसे ही मिलता रहे हमें....🥰🌸

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  17. तीनों रचनाएं बहुत सुंदर हैं. रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं !
    रीता प्रसाद

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  18. आपका सभी का हार्दिक आभार।

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  19. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 20 जुलाई 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!


    !

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  20. Congratulations Shivani 🎉

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    1. बहुत बहुत धन्यावाद apka 🌸🙏

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    2. Thank you 🥰

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    3. Thank you 🌸

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  21. So thoughtful and vrey nice ☺
    Shivani ✨

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  22. बहुत सुंदर रचनाएँ!!

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  23. सुंदर मनभावन कविताएँ । आगमन का हुंकार दे दो श्रावणी फुहार देदो वाह अप्रतिम सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई । सादर कमला निखुरपा

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  24. बहुत सुंदर सृजन !

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