1. मेघ से मनुहार/ भावना चौधरी
श्याम-वर्ण मेघा सघन
चीरकर विस्तृत गगन
दामिनी को साथ लेकर
गर्जना का नाद लेकर
न तपन भू पर बचेगी।
आगमन हुंकार दे दो
श्रावणी फुहार दे दो
यह धरा ऊसर है तुम बिन
नद स्तर है निम्न तुम बिन
कितने जोड़े सूखी आँखें
बाट जोहती रोज दिन गिन
तप्त धरती, शुष्क वन हैं
आस में सूखे नयन हैं
तप्त भू, हारे हृदय को
आशा का संचार दे दो
श्रावणी फुहार दे दो
तर गला कर दो डगर का
अंक भर दो सर-सगर का
आज धरती पर लुटा दो
कोष संचित वर्ष भर का
फिर मयूरा मन में नाचे
मन प्रणय की पाती बाँचे
इंद्रधनुष के रंग सजाकर
अधरों को मल्हार दे दो।
-0-कोटा, राजस्थान।
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2.नदी / सुरभि डागर
कल-कल करती बहती नदी,
जीवन का संगीत सुनाती।
पर्वत की गोदी से निकल,
धरती का शृंगार बढ़ाती॥
शीतल जल की निर्मल धारा,
सबकी प्यास सदा बुझाती।
खेतों में हरियाली भरकर,
अन्न की खुशियाँ ले आती॥
पथ में चट्टानें हों चाहे,
रुकना उसने कभी न जाना।
संघर्षों से लड़ते-लड़ते,
जीवन का संदेश सुनाना॥
पक्षी, वन, उपवन और पशु,
सबका वह जीवन बन जाती।
ममता की अविरल धारा-सी,
हर मन में विश्वास जगाती॥
आओ हम सब मिलकर इसकी,
निर्मलता का मान बढ़ाएँ।
प्रदूषण से बचा नदियों को,
स्वच्छ धरा का स्वप्न सजाएँ॥
कल-कल करती बहती नदी,
प्रकृति का अनुपम उपहार।
जीवन की यह अमृत-धारा,
जग के प्राणों का संचार॥
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3-तलाश / शिवानी रावत
ना भूत की, ना भविष्य की
ना तख्त
- ओ ताज की
मुझे तलाश आज की
जहाँ
सच बिके ना
जहाँ झूठ टिके ना
जहाँ दिल से दिल जुड़े हो
जहाँ सुख-दुख में सब
एक दूजे संग खड़े हो
जहाँ रिश्तो में अटूट विश्वास हो
जहाँ प्रेम ,सहयोग, सम्मान का वास हो
ऐसे सुंदर समाज की
मुझे तलाश आज की
आपस में हो प्रेम और बढ़े
भाईचारा
सीता - सा धैर्य, राम - सी
मर्यादा
रिश्तो में स्वार्थ कम, हो
प्रेम ज्यादा
जहाँ अमीरी का रौब न हो
जहाँ गरीबी पीड़ित ना हो
जहाँ दया ,धर्म क्षमा का भाव हो
ऐसे आदर्श समाज की
मुझे तलाश आज की
जहाँ संस्कार ,संस्कृति का प्रसार
हो
जहाँ युवा बच्चों में बूढ़े
माँ-बाप के प्रति
प्यार और सत्कार हो
भले न पूजे कोई भगवान
बस मन में ना हो छल कपट और अभिमान
जहाँ मानवता को से सबका नाता हो
ऐसे निर्मल समाज की
मुझे तलाश आज की।
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बहुत-बहुत धन्यवाद sir बहुत बहुत आभार आपका 🙏🙏😊
ReplyDeleteThe poem of my dear friend is very cool and amazing.
ReplyDeleteThank you 🥰🌸
DeleteWow didi❤️🤌
ReplyDeleteThank you 🥰
Delete"जितनी खूबसूरत आप हैं, उतनी ही खूबसूरत और गहरी आपकी poem होती है। हमेशा यूं ही लिखती रहिए। Proud of you, Di! ✍️🌟"🥰
DeleteReshma Rawat
Nice poem
ReplyDeleteBahut achii kavita likhi hai aapne shivani ji... Bhut achi... Aise hi aage badhte rahiye life mein...
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यावाद
DeleteNicee dii
ReplyDeleteThank you
Delete❣️❣️
ReplyDelete👏👏
ReplyDeleteWishing you bat for your Future keep going Girl!!! Your poem is voice of our life ❤️ Lots of love from LUCKNOW.
ReplyDeleteThank you so much
DeleteCongratulations 🎉 Shivani 🥳👏
ReplyDeleteThank you dear
DeleteNice 👌
ReplyDeleteThanks
Deleteबहोत अच्छी कविता है 🫀❤
ReplyDeleteThank you
DeleteBahut sunder 👌👌
ReplyDeleteThank you
DeleteNice poem
ReplyDeleteThank you
DeleteVery Very Nice poem🥰🥰
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यावाद
ReplyDeleteसुन्दर कविताओं के लिए आप सभी को बहुत बधाई
ReplyDeleteधन्यवाद आपका
Deleteअधिकतर साथियों ने टिप्पणी में अपना नाम तक नहीं लिखा।
ReplyDeleteउत्कृष्ट सृजन 🌹भावपूर्ण कविताएँ.. 🌹🙏🏻
ReplyDeleteThank you
Deleteतीनों कविताएँ बहुत सुंदर हैं, एक ओर मेघ से पृथ्वी पर आने की मनुहार है, नदी के प्रति आभार है तो दूसरी ओर सुंदर समाज की तलाश है। बहुत अच्छी रचनाओं के लिए आप सभी को हार्दिक बधाई ।सुदर्शन रत्नाकर
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यावाद आपका 🌸🙏
Deleteतीनों रचनाकारों ने बहुत सुंदर ढंग से अलग-अलग मनोभावों को कविता में पिरोया है, भावना जी,सुरभि जी और शिवानी को बहुत-बहुत बधाई।
ReplyDeleteबहुत बहुत आभार आपका आप सबका प्यार और आशीर्वाद एसे ही मिलता रहे हमें....🥰🌸
Deleteतीनों रचनाएं बहुत सुंदर हैं. रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं !
ReplyDeleteरीता प्रसाद
आपका सभी का हार्दिक आभार।
ReplyDeleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 20 जुलाई 2026 को लिंक की गयी है....
ReplyDeletehttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
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Congratulations Shivani 🎉
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यावाद apka 🌸🙏
DeleteThank you 🥰
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