1- पहाड़ी
झील(हाइकु)
1
एकाकी झील,
देवदारों-बांजों
में
पहाड़ी झील!
2
आया न कोई
शैवाल ओढ़कर
झील है सोई।
3
बीता शिशिर
झील के तल पर
कंपन फिर!
4
बलूत रक्षी
रहस्यभरी झील
निधि किसकी?
5
वन सघन
असंख्य पत्तों
ढका
झील का मन।
6
झील है सोई
कविमन खोजता
रूपक कोई।
7
खिली है धूप
स्वर्णमयी हो रहा
झील का रूप।
8
चाँदनी तले
झील का चेहरा भी
रंग बदले।
9
आया समीप
झील के तट पर
पक्षी की बीप!
10
हिम-परत
स्थितप्रज्ञ-सी
झील
योग-निरत!
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डॉ. कुँवर दिनेश सिंह
प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, धामी (शिमला), हिमाचल प्रदेश।
ईमेल: hyphenjournal@gmail.com
मोबाइल: +91 94186 26090
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2-वाह रे नीर, अद्भुत है तू / डॉ. कनक लता
वाह रे नीर अद्भुत है तू
पृथ्वी का अस्तित्व है तुझसे
जीवन का आधार है तू
तेरी बूँद- बूँद बूँद अनमोल रतन
ईश्वर का उपहार है तू
वाह रे नीर ,अद्भुत है तू
धारा के साथ बहे,
नदी कहलाए
लहरों के साथ चले तो समुद्र है तू
ठहरे तो सुरम्य झील बने
हिम के रूप में कठोर भी है तू
वाह रे नीर अद्भुत है तू
सम्पूर्ण ब्रह्मांड कायम है तुझसे
नियंत्रण रहित प्रलय भी है तू
कुछ नहीं था तब भी तू था
कुछ नहीं होगा तब भी है तू
वाह रे नीर अद्भुत है तू
निर्मल तुझी से है सारा जहान
शीतलता की पहचान है तू
तूफ़ानों की प्रचण्ड शक्ति है तुझमें
प्यासों के लिए वरदान है तू
वाह रे नीर अद्भुत है तू
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उपर्युक्त लिखे हुए हाइकु बहुत ही उत्कृष्ट हैं... 👏🏻👏🏻🙏🏻
ReplyDeleteइसी क्रम में मेरी कविता को स्थान देने के लिए काम्बोज भइया को बहुत धन्यवाद....🙏🏻☺️
बहुत सुन्दर सार्थक रचना आज के लिये।
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteसुन्दर हाइकु, उत्कृष्ट कविता, हार्दिक शुभकामनाएँ।
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