पथ के साथी

Friday, April 10, 2026

1450-अनिता मण्डा की कविताएँ

 

 अनिता मण्डा

 


1. तुम्हारी हथेली

 

काश! कि ये दुनिया

कोमल होती

तुम्हारी हथेली की तरह

 

मैं रख देती चुपके से

इच्छाओं के फूल

और गहरी साँसें

 

पतझड़ की टूटन 

अब सँभलती नहीं

 

उदासियाँ दफ़न हो रही हैं

साँसों में

साँसें कितनी उथली चलती हैं

इन दिनों।

-0-

2. मेरी हथेली

 

मेरी हथेली

भरी हुई तुम्हारी हथेली से

और रोम-रोम जैसे

खिले हुए फूल

साँसों में बहती हुई इच्छाएँ

यह पल तो ठहरना चाहिए

बहुत देर तक

 

यह पल ठहरा रहेगा

कयामत तक

-0-

 

3-खामोशी

 

 

न डोर टूटती है

न पतंग उड़ती है

 

शौक था फूलों का ख़ुशबुओं का

हाथ जख़्मी हैं 

दिल के घावों से चू रहा है ख़ून

 

सन्नाटों से भरे अँधेरे जंगलों में 

बिनाई ढूँढती रही जुगनू

 

ख़ामोशी की चादर 

रात के काले आसमान सी तनी 

आँखें देर तक खोजती रही 

तारों के फूल

 

बहुत कुछ कहना था

मन में छटपटाता रहा

अँधेरे कुँओं के भीतर टकराते 

चमगादड़ों-सा

एक लफ्ज़ भी 

होठों की सीमा न लाँघ पाया

 

दरिया से बाहर जाने की बेचैनी में

लहरें सिर पटकती रहीं किनारों पर

साँसें उथली होतीं

फिर चल पड़तीं

 

वक़्त के कबूतर का गला

बिल्ली के नुकीले दाँतों में फँसा है

 

कितने ही उम्मीदों के पेड़ बोएँ

हवा का ज़हर कम ही नहीं हो रहा

कितने ही दुआओं के फूल खिलें

बारूद है कि सुलगता ही जाता है

 

कोई जादू का पानी नहीं 

कि आग बुझा दूँ

कोई जादू का मंत्र भी तो नहीं  

कि बाँच दो 

सो जाएँ सारी बेचैनियाँ

 

आँधियों के बीच 

यूँ ही जला रखना है मुझे

अपना दीप

ख़ामोशी से।

-0-

6 comments:

  1. मेरी कच्ची पक्की अनुभूतियों को यहाँ सहेजने के लिए दिल से आभारी हुँ।

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  2. बहुत सुंदर सृजन।
    खूब बधाइयाँ आपको 💐

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  3. बहुत बहुत सुंदर सृजन

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  4. बहुत कोमल अनुभूतियों को शब्दों में पिरोती सुन्दर कविताएँ। अनिता मंडा जी को बहुत बहुत बधाई -शिवजी श्रीवास्तव

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  5. बहुत सुंदर सृजन ...बधाई आपको।

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  6. बहुत ही सुन्दर, हार्दिक बधाई आपको।

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