पथ के साथी
Monday, August 30, 2010
बीवी बोली-
मैँ बोला-जो तुम मर गई तो मैँ पागल हो जाऊँगा
और पागल का क्या है भरोसा,वो कुछ भी कर सकता है .
-अमीर मुमकिन सहारनपुरी
(यह त्रिपदी हिन्दी -उर्दू के मशहूर कवि आदिल रशीद जी ने उपलब्ध कराई है)
Thursday, August 26, 2010
शीतल छाँव
Tuesday, August 24, 2010
रक्षा -बंधन पर विशेष
रक्षाबन्धन- [हाइकु]
Monday, August 23, 2010
Wednesday, August 18, 2010
कविताएँ
रेखा मैत्र का जन्म बनारस (उ.प्र.) में हुआ। प्राथमिक शिक्षा बनारस में होने के बाद आपने सागर विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में एम.ए. किया। तदनन्तर, मुम्बई विश्वविद्यालय से टीचर्स ट्रेनिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। इसके अलावा आपने केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा में प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण के विशेष कार्यक्रम में भाग लिया। कुछ समय तक मध्य प्रदेश में आयोजित ’अमरीकी पीस कोर’ के प्रशिक्षण कार्यक्रम में अमरीकी स्वयंसेवकों को आपने हिन्दी भाषा का प्रशिक्षण दिया। फिर ५-६ वर्षों तक राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार के मुम्बई स्थित हिन्दी शिक्षण योजना के अन्तर्गत विभिन्न केन्दीय कार्यालयों/उपक्रमों/कम्पनियों के अधिकारियों और कर्मचारियों को हिन्दी भाषा का प्रशिक्षण दिया। ५ मुट्ठी भर धूप
Sunday, August 15, 2010
आटे की चिड़िया (हाइकु)

Saturday, August 14, 2010
आज़ादी है
आज़ादी है : रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु'
नाचो गाओ ,खुशी मनाओ- आज़ादी है
लूटो –खाओ , पियो-पिलाओ आज़ादी है
भूखी जनता टूक न मिलता आज़ादी है
छीनो -झपटो ,डाँटो –डपटो आज़ादी है
दफ़्तर-दफ़्तर ,बैठे अजगर आज़ादी है
जेब गरम है ,बिकी शरम है आज़ादी है
फ़ाइल सिसके ,बाबू खिसके आज़ादी है
सज्जन रोता , आफ़त ढोता -आज़ादी है
नोट बिछाए ,नींद न आए -आज़ादी है
गुण्डे छूटे , जीभर लूटे -आज़ादी है
छीना चन्दा ,अच्छा धन्धा -आज़ादी है
नफ़रत पलती , बस्ती जलती -आज़ादी है
पेड़ कटे हैं, खेत लुटे हैं -आज़ादी है
कपटी मुखिया ,हर घर दुखिया -आज़ादी है
जब मुँह खोलें , लटपट बोलें -आज़ादी है
सुरसा आई , बन महँगाई आज़ादी है
आज पुजारी , बने जुआरी -आज़ादी है
ढोंगी बाबा , अच्छा ढाबा -आज़ादी है
लूट मची है , छूट मची है -आज़ादी है
सब कुछ लूटा , धीरज छूटा -आज़ादी है
घोटाले हैं, दिलवाले हैं- आज़ादी है
आग-धुआँ है ,नहीं कुआँ है -आज़ादी है
गड्ढा सड़कें , चल गिर पड़के-आज़ादी है
गुरु है ढेला ,गुड़ है चेला -आज़ादी है
जाति –धर्म है , बुरे कर्म हैं-आज़ादी है
भाई-भाई , लड़ें लड़ाई - आज़ादी है
अपनी अपनी ,सबकी ढपली -आज़ादी है
कामचोर हैं ,घूसखोर हैं-आज़ादी है
चोरी करते ,ज़रा न डरते -आज़ादी है
सन्न इलाका , दिन में डाका-आज़ादी है
बन्द है चक्का, धक्कम धक्का -आज़ादी है
करते अनशन ,रोज़ प्रदर्शन -आज़ादी है
चोर लुटेरे , सबको घेरे -आज़ादी है
जागो-जागो , अब तो भागो आज़ादी है
जिसका जूता , उसका बूता -आज़ादी है
भूखे घर हैं , प्यासे दर हैं-आज़ादी है
ऊँचा झण्डा , चलता डण्डा-आज़ादी है
रहे जो भक्षक ,बने वे रक्षक-आज़ादी है
लुटा ख़ज़ाना , सबने माना -आज़ादी है
भले जेल में , बुरे खेल में-आज़ादी है
न्याय रो रहा , चोर सो रहा -आज़ादी है
क्या अब करना , जीना ? मरना-आज़ादी है
‘आओ प्यारे वीरो आओ’ -आज़ादी है
हाथ लगे जो ,सब खा जाओ -आज़ादी है
-0-