पथ के साथी

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Monday, March 16, 2026

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 कहन मुकरियाँ

डॉ.सुरंगमा यादव

1

उसे देख सब थर- थर काँपें

 अगन  देखकर पर वह  भागे

 रख दे हाड़  चीर बेदर्दी

का सखि साजन?  नहिं सखि  सर्दी

2

 अपनी मर्ज़ी खूब चलाए

 वह टैरिफ का भय दिखलाए

 हर ओर मचा रखा हड़कंप  

 का सखि साजन? नहीं सखि ट्रंप

3

कैंची सुइयाँ  खूब चलाए

सिहा -सिहाकर रूप सजाए

 रखता  वो ग्राहक की मर्जी

 का सखि साजन? नहिं सखि दर्जी

4

मच  रहा   चारों ओर धमाल

आज है बदली  सबकी  चाल

हर मुखड़ा लगता  रंगोली

का सखि साजन? नहिं सखि होली

 

5

 एक बार कुर्सी जो पाए

 पुश्तों को वो  ठाठ कराए

 जनता की  वो सुध ना  लेता

 का सखि साजन? नहिं सखि नेता

6

धूप -ताप वो नहीं मनाए

माटी  से सोना  उपजाए

 फिर भी सुख को सका ना  जान    

का सखि साजन? नहिं सखि  किसान

7

 काठ  काटके वो रख देता

 कमल कैद उसको कर लेता

 गुनगुन गाता है वह जी भर 

का सखि साजन? नहिं सखि मधुकर

8

हाय  बीती जाए  जवानी

कहाँ -कहाँ न खाक है छानी

मिले ना  उसके बिन  सत्कार 

का सखि साजन? नहिं  रोजगार

9

सर्दी में नरमी दिखलाए

गर्मी में तेवर चढ़ जाए

देख उसीको  खिलते नीरज

का सखि साजन? नहिं सखि सूरज

10

सागर में उद्वेलन लाए

विरहन के मन  अगन जगाए

झील में लगता आया फाँद

का सखि साजन? नहिं सखी चाँद

11

 शादी को तैयार न हों अब

बिन फेरों  के साथ रहें अब

रिश्ता चलता पर कुछ ही दिन

का सखि साजन? नहिं सखि ‘लिवइन’

 12

पढ़- लिखकर बोलें  अंग्रेजी

 मात- पिता पर रखते तेजी

 भूल गए  सब अपनी  संस्कृति

 का सखि साजन? नहिं सखि संतति

13

पढ़ -लिखकर अक्षर दो -चार

मात- पिता पर  रहें  सवार

सब कामों में  अपनी मर्ज़ी

का सखि साजन? नहीं  ‘जेन जी’

14

आसमान वह छूता जाए

दूर  पहुँच से होता जाए

खो जाए तो आए  रोना

का सखि साजन? नहिं सखि सोना

15

रूठे अभी, अभी  मन जाए

सबके मन में प्यार जगाए

मन है उसका उजला दर्पण

 का सखि साजन? नहिं सखि बचपन

16

मानव प्रज्ञा है गतिशालिनी

नित प्रति नूतन पथ प्रकाशिनी

अद्भुत कौशल अब है लाई

का सखि साजन? नहिं ‘ए आई’

17

नित्य नए छूती आसमान

फिर भी मिलता  उचित ना मान

क्षमा-दया की है  वह  मूरत 

का सखि साजन? नहिं सखि औरत

18

सुंदर रूप मनोहर पाया

बदली देख-देख हर्षाया

जंगल में नाचे कहीं  दूर

का सखि साजन? नहिं सखि मयूर 

 

19

ब्याह नहीं वे सौदा करते

लंबी लिस्ट लिये हैं  फिरते

फिर-फिर  रखते जाएँ  सहेज

का सखि साजन? नहिं सखि दहेज 

20

आज ब्याह, कल तनातनी है

तू- तू, मैं- मैं  कहासुनी  है

उनके लिए है बना  मजाक

का सखि साजन? नहिं सखि तलाक

21

मन के भीतर बसकर रहतीं

न ही कोई किराया देतीं

 टीस जगा दें, मन सहला दें

का सखि साजन? नहिं सखि यादें

22

 काम किचन में वह तो आए

 लम्बा है पर गोल बनाए

बहुत काम का जब हो अनबन

का सखि साजन? नहिं सखि बेलन

23

 पाकर राज करे मनमानी

 बात नीति की हुई पुरानी

अवसर देख के बदले रीति

का सखि साजन? नहिं राजनीति

24

 ढील मिले तो हाथ न आए

 संग हवा के उड़ती जाए

 पेंच लड़ाने की एक चंग

 का सखि साजन? नहिं सखि पतंग

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