पथ के साथी

Thursday, January 22, 2026

सरस्वती -वन्दना

  डॉ.सुरंगमा यादव

 


द्मासना वीणापाणि, ज्ञान गरिमादायिनी

श्वेतवसना, शुभ्रवर्णा, हस्त पुस्तकधारिणी

है प्रणत मन तव चरण में ,तुम कृपा साकार हो
प्रज्ञा की प्रखरता तुम्हीं, सृजन का आधार हो
शीश पर माँ हाथ धर दो, प्रार्थना स्वीकार हो।।

सप्त स्वर,नवरस स्वरूपा, तुम कला का मान हो
चेतना का जागरण हो, लक्ष्य का संधान हो
सोए संवेदन जगा दो, प्रेम का उपधान दो ।।

तृषित जग चातक विकल माँ, वासना के ताप से
ज्ञान स्वाति बिंदु माँगे, याचना में आपसे
मानवोचित भाव चिंतन, आचरण निष्पाप दो।।

 

 

 

11 comments:

  1. माँ सरस्वती जी की वंदना पर कोई टिप्पणी लिख सकूँ इतनी क्षमता ही नहीं है मुझमें बस इतना ही कह पाऊँगी कि सरस्वती जी को समर्पित इस वंदन गीत में जिन शब्दों को पिरोया गया है वो बहुत ही उत्कृष्ट हैं और शैली भी अद्भुत और वंदनीय है...🙏🏻👏🏻👏🏻

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  2. बहुत सुंदर, सादर वंदन

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  3. बहुत ही सुन्दर, हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  4. बहुत ही सुन्दर आपको हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।
    सुरभि डागर

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  5. बहुत सुन्दर भावपूर्ण वंदना। हार्दिक बधाई

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  6. बहुत सुन्दर भावपूर्ण वंदना...हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  7. भावपूर्ण वंदना🙏🙏

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  8. उत्कृष्ट, भावपूर्ण सरस्वती-वंदना।सुदर्शन रत्नाकर

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  9. बहुत सुंदर वंदना सुरंगमा जी!

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  10. अत्यंत सुन्दर भावपूर्ण शब्दों से सजी सरस्वती वंदना की बहुत -बहुत बधाई
    शीला मिश्रा

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  11. इतनी सुंदर वंदना...
    आप पर माँ सरस्वती की कृपया यूँ ही बनी रहे। मेरी बहुत बधाई

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