पथ के साथी

Saturday, February 27, 2021

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 1-कमला निखुर्पा

1

बहुत दिनों के बाद

 जी भर के कल रात ,

 मैने  की है  चाँद से कुछ बात

-0-

2-मुकेश बेनिवाल

1

ज़िन्दगी की किताब में

हर रंग के काग़ज़ हैं

परेशानियों के पन्नों को

पतंग बनाकर उड़ा दो

ग़मों के पन्नों की

कश्ती बनाकर बहा दो

चुनकर बेहतरीन पन्ने

ज़िन्दगी को रंगों से सजा लो

2

 बदलता हुआ ये वक़्त

बहुत कुछ कह गया

मतलब की बाढ़ में

हर किरदार बह गया

ख़ुशी में ख़ुश होता है

और दुःख में दुःखी 

सिर्फ़ आईना ही है

जो वफ़ादार रह गया

-0-

9 comments:

  1. कमला जी बहुत सुंदर बात कही तीन पंक्तियों में। बधाई।
    मुकेश बेनीवाल जी प्रेरक कविता आपकी बहुत अच्छी लगी। बधाई।

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  2. जिन्दगी की किताब में, वाह।
    मुकेश जी बधाई।

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  3. बहुत दिनों के बाद- वाह कमला जी। बहुत सुंदर। बधाई
    मुकेश जी प्रेरणादायी कविताओं के लिए हार्दिक बधाई।

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  4. बहुत दिनों बाद,,
    जिंदगी की किताब,, सुंदर,प्रेरक रचनाओं के लिए हार्दिक बधाई।
    -परमजीत कौर'रीत'

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  5. कमला जी और मुकेश जी बहुत ही बढ़िया रचनाएँ
    सुन्दर सृजन के लिए हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें

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  6. सुंदर सृजन के लिए कमला जी और मुकेश जी को हार्दिक बधाई।

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  7. वाह अनुपम भावों का संगम ...

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  8. वाह! कमला ली की पंक्तियों की सादगी बड़ी ही मनमोहक!
    वही मुकेश जी की छोटी छोटी कविताएँ भी बड़ा भाव लिए!आप दोनों को बहुत बहुत बधाई!

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