पथ के साथी

Tuesday, April 7, 2020

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दस्तक दे दी है  
शशि पाधा

दस्तक दे दी है  
फिर से 
फ़ोटो-शशि पाधा
वसंत ने  
उसे शायद पता नहीं  
कि
धरती जूझ रही है 
अनजान दुश्मन से 
पहाड़ खड़े हैं 
हैरान–बेजान 
नदियाँ–सागर 
पूछ रहे हैं
जटिल  प्रश्न 
हाथ मलता देख रहा है  
आसमान 
और दुश्मन 
चुपके से कर रहा है
 प्रहार,आघात
ओ रे वसंत! 
तुम्हारे पास तो होगी न  
कोई छड़ी, जादू की------- 
सुन रहे हो न ??????
 वह छड़ी घुमा दो
जितने भी पतझरी प्रयास हैं,
उन्हें भगा दो !
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11 comments:

  1. संकट की इस घड़ी में प्रकृति का सहयोग भी आवश्यक है। तुम्हारे पास तो होगी न, कोई छड़ी जादू की। बहुत सुन्दर भाव लिए कविता ।बधाई ।

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  2. शशि पाधा जी की कविता विषयवस्तु और भाव दोनों ही दृष्टि से उत्तम कविता है।

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  3. मेरी कविता को पसन्द करने के लिए धन्यवाद । - शशि पाधा

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  4. बहुत सुन्दर

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  5. बेहतरीन कविता के लिए बहुत बधाई शशि जी...

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  6. आज के सन्दर्भ में कितना सटीक शब्द है पतझरी प्रयास. बहुत भावपूर्ण रचना, बधाई शशि जी.

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  7. वाह शशि जी आज कोरोना के संकट में वसंत से जादू की छड़ी घुमाने की गुहार अत्यंत मन भावन कविता है बधाई स्वीकारें |

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  8. रचनाओं को स्थान देने हेतु हिमांशु जी शतशत आभार

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  9. "सहज साहित्य" निस्संदेह एक सार्थक पहल है, जिसका ऐतिहासिक महत्व है। हिमांशु जी आपकी निष्ठा और लगन स्तुत्य।

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  10. बहुत सुन्दर

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