पथ के साथी

Thursday, December 19, 2019

940-एक शिक्षक से मिलिए


एक शिक्षक से मिलि
सुलक्षणा
     
अगर सीखनी है सहनशीलता ,
एक शिक्षक से मिलिए ।
अगर सीखनी है  सिखाने का धैर्य ,
एक शिक्षक से मिलिए । 

अगर सीखना है निष्ठापूर्वक करना परिश्रम,
एक शिक्षक से मिलिए 
अगर सीखनी है कर्मठता,
 एक शिक्षक से मिलिए ।

अपने बच्चों से तो सभी करते हैं प्यार ,
अगर सीखना है  दूसरे बच्चों के लिए 
प्यार और लगाव , स्नेह की फुहार
तो  एक शिक्षक से मिलिए ।

दान तो सभी देते हैं
अगर देना चाहते हैं -सच्चा दान 
 वह है शिक्षा का दान ,
 तो एक शिक्षक से मिलिए ।

अगर सीखना चाहते हैं देकर ,
कुछ पाने की इच्छा ना करना ,
तो एक शिक्षक से मिलिए । 

शिक्षक का आदिकाल में था बहुत सम्मान ,
पर खो रहा है अब उसका मान 
अगर सीखनी है ऐसी सहनशीलता ,
तो एक शिक्षक से मिलिए ।


ख़ूब मेहनत करने पर भी नहीं मिलता है
उसको उचित आदर सम्मान और स्थान 
अगर सीखना  है ऐसा कर्म निष्काम ,
तो एक शिक्षक से मिलिए ।

शिक्षक एक है पर निभाता है भूमिका ,
माता- पिता और शुभचिंतक की 
अगर सीखनी है ऐसी भूमिका  का निर्वाह,
तो एक  शिक्षक से मिलिए ।

शिक्षक छात्र  का जीवन सँवारता है ,
बुनता है उसके  लिए सपने 
अगर सीखनी है ऐसी  स्वप्नदर्शिता ,
तो  एक शिक्षक से मिलिए ।
-0- सुलक्षणा, राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय,सेक्टर-21 रोहिणी दिल्ली

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर

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  2. बहुत बढ़िया सुलक्षणा जी !

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