पथ के साथी

Thursday, July 26, 2018

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1-डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा
1
अभिमंत्रित
मुग्ध-मुग्ध मन
मगन हो गई,
लो आज धरती
गगन हो गई ।
2
दूर क्षितिज में
करता वंदन
नभ नित
साँझ-सकारे
प्रतिपूजन में
धर कर दीप धरा भी
मिलती बाँह पसारे !
3
मौन भावों के
जब उन्होंने
अनुवाद कर दिए,
किसी ने भरा प्रेम
किसी ने उनमें
आँसू भर दिए।
4
तरंगायित है
आज वो
ऐसी तरंगों से
भर देगा जग को
प्यार भरे रंगों से 
-०-

18 comments:

  1. अति सुंदर सृजन, हार्दिक बधाई, डॉ ज्योत्स्ना जी।

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  2. बहुत सुंदर | ज्योत्स्ना जी हार्दिक बधाई |

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  3. सुन्दर रचनाएँ ...बधाई स्वीकारें |
    पूर्वा शर्मा

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  4. प्रेरक प्रतिक्रिया सहित उपस्थिति के लिए आदरणीया कृष्णा दीदी , कविता जी एवं पूर्वा जी का हृदय से आभार !

    यहाँ स्थान देने के लिए आदरणीय काम्बोज भैया जी का भी हार्दिक धन्यवाद !

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

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  5. बहुत सुंदर क्षणिकाएँ ज्योत्सना जी। हार्दिक बधाई।

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  6. सुंदर, भावपूर्ण सृजन ज्योत्स्ना जी | बधाई |

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  7. सुंदर, मनोरम भाव भरी । वाह।

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  8. बहुत सुन्दर रचनाएँ, बधाई ज्योत्स्ना जी.

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  9. सुन्दर रचना

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  10. प्रेरक प्रतिक्रिया के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद |
    सदैव स्नेहाशीष की कामना के साथ

    ज्योत्स्ना शर्मा

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  11. बहुत ही सुंदर भावाव्यक्ति
    हार्दिक बधाई

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  12. Bahut sundar rachnayen bahut bahut badhai jyotsana ji.

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  13. बहुत सुंदर रचनाएँ| ज्योत्स्ना जी हार्दिक बधाई |

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  14. स्नेहसिक्त प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार !

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  15. मौन भावों के
    जब उन्होंने
    अनुवाद कर दिए,
    किसी ने भरा प्रेम
    किसी ने उनमें
    आँसू भर दिए।

    हृदयस्पर्शी सृजन ,हार्दिक बधाई👌👌👌👌👌

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  16. बहुत प्यारी क्षणिकाएँ , बधाई

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