पथ के साथी

Saturday, September 30, 2017

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अब लौट आओ न माँ
सत्या शर्मा ' कीर्ति '




इस धरा - गगन के प्राण वायु
हो रहे क्षण- क्षण  कलुषित माँ
भर दो इसे स्नेह अमृत से
मुझमें ही बन ममता रू
लौट आओ न शिवानी माँ ।।

चारों ओर बिखरे महिषासुर
तार - तार करने अस्मत को
शुम्भ - निशुम्भ बढ़ते प्रतिपल
  मुझमें ही बन काल रू
लौट आओ न काली माँ ।।

अशिक्षा और अज्ञान का
है फैला यूँ साम्राज्य यहाँ
मिटा सकूँ जग की अविद्या
मुझमें ही बन विधा रूप
लौट आओ न शारदा माँ ।।

लोभ - लालच का दैत्य बड़ा
करता घोर अनाचार यहाँ
दरिद्रता अग्नि से धरा बचाने
मुझमें ही बन श्री लक्ष्मी रूप
लौट आओ न लक्ष्मी माँ ।।

पापियों का जुल्म बहुत
फैला है तेरे इस जगत में
दुष्टों के छल - बल को हरने
बन चंडी रूप  मुझमें ही
आ लौट आओ न दुर्गा माँ ।।

बच्चों का उद्धार करने
सृष्टि का विस्तार करने
भक्ति का संचार करने
अब लौट आओ न मेरी माँ

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22 comments:

  1. वाह, बहुत सुंदर रचना !!

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    1. आपका दिल से शुक्रिया अनीता जी
      विजयादशमी की हार्दिक शुभकामना

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  2. सुंदर प्रस्तुति

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    1. सादर धन्यवाद पूर्णिमा जी
      विजयादशमी की हार्दिक शुभकानाएं

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (01-010-2017) को
    "जन-जन के राम" (चर्चा अंक 2744)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    विजयादशमी की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. बहुत बहुत आभार आदरणीय सर ।
      मेरी रचना को पसन्द करने के लिए ।हार्दिक धन्यवाद

      विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं

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  4. दिल से धन्यवाद कम्बोज भैया जी मेरी रचना को स्थान देने के लिए।
    सादर आभार

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  5. दिल से धन्यवाद कम्बोज भैया जी मेरी रचना को स्थान देने के लिए।
    सादर आभार

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  6. हार्दिक बधाई सत्या जी, सुन्दर रचना हेतु।

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  7. धरा से अन्याय मिटाने के लिए देवी के अवतरित होने की कामना की सुन्दर कविता के लिये सत्य कीर्ति जी को हार्दिक बधाई ।

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  8. This comment has been removed by the author.

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  9. शानदार सृजन के लिए आत्मिक बधाई प्रिय सखी...जय माता दी

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  10. देवी के अवतरित होने की कामना की सुन्दर कविता के लिये हार्दिक बधाई ।

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  11. सुन्दर रचना

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  12. सुन्दर रचना, बधाई सत्या जी.

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  13. बहुत सुंदर रचना...बधाई सुरंगमा जी।

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  14. बहुत सुंदर रचना...बधाई सत्या जी।

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  15. बहुत सुंदर रचना !!सत्य कीर्ति जी को हार्दिक बधाई ।

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  16. बहुत सुन्दर आह्वान ....हार्दिक बधाई सत्या जी !

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  17. बहुत सुन्दर रचना...हार्दिक बधाई...|

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  18. बहुत अच्छी रचना...मेरी बधाई...|

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