पथ के साथी

Sunday, May 2, 2021

1099-जीभर प्यार करूँ (मुक्तक)

 

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1


यह दुनिया
  तो दो पल की है, बस  मैं इतना इज़हार करूँ

जो चाहे नरत करता हो, मैं तुझसे जीभर प्यार करूँ

सुख-दुख तो आते-जाते है, ये अपना फ़र्ज़ निभाने को

आँख मुँदे जब अन्तिम पल में,मैं तेरा ही दीदार  करूँ।

2

धूप है, ठण्डी हवाएँ साथ हैं ।

लाख दुश्मन, सब दिशाएँ साथ हैं ।

पथ में बाधाएँ माना हैं खड़ीं

हमेशा शुभकामनाएँ साथ हैं।

3

प्राण जब तक, हम तुम्हारे साथ होंगे ।

सिन्धु तक, दोनों किनारे साथ होंगे ।

कब प्रेम का जल, सूखता है धूप से

हम सदा बाहें पसारे साथ होंगे ।

4

सीख देने आ गई, इस लहर से तुम डरो।

विषबेल सींचो  नहीं, इस ज़हर से तुम डरो।

प्यार दिल में है नहीं, ना सही , इतना करो

जीभ कोरोना बने, इस कहर से तुम डरो।

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18 comments:

  1. उत्कृष्ट लेखन, हार्दिक बधाई।

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  2. टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार

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  3. बहुत बढ़िया सृजन...हार्दिक बधाई।

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  4. बहुत सुंदर, भावपूर्ण मुक्तक। मन को छू गए। हार्दिक बधाई

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  5. बहुत सुंदर

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  6. पथ में बाधाएँ माना हैं खड़ीं
    हमेशा शुभकामनाएँ साथ हैं।

    बाधाओं से लड़ने को शुभकामनाओं का साथ अति सुंदर प्रयोग।
    सभी मुक्तक प्रेरक। बधाई।

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  7. बहुत सुंदर भावपूर्ण सृजन। हार्दिक बधाई।

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  8. भावपूर्ण रचनाएँ
    बधाइयाँ स्वीकार करें

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  9. बहुत सुंदर मुक्तक।बधाई भैया जी।

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  10. आपके चारो मुक्त्क अत्यंत गम्भीर और सार्थक हैं | अंधार -में प्रकाश की ज्योति और निराशा में आशा की किरन समान | बहुत ही सुंदर ! श्याम हिन्दी चेतना

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  11. लाख दुश्मन सब दिशाएं साथ हैं....
    सिंधु तक दोनों किनारे साथ होंगे....
    बहुत सुंदर भाव!!

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  12. सभी मुक्तक भावप्रवण हैं। बधाई काम्बोज भैया।

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  13. बहुत सुंदर मुक्तक, हार्दिक बधाई।

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  14. बढ़िया। अंतिम मुक्तक बहुत कुछ कह गया।

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  15. उत्कृष्ट सृजन,हर मुक्तक लाजवाब!
    हार्दिक बधाई भैयाजी।

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  16. सभी मुक्तक अत्यंत भावपूर्ण, बहुत सुंदर!
    हार्दिक बधाई आदरणीय भैया जी! आपको एवं आपकी लेखनी को नमन!

    ~सादर
    अनिता ललित

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  17. बहुत सुन्दर...आपकी कलम से निकले भाव दिल तक पहुँचे हैं, मेरी ढेरों ढेर बधाई |

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