पथ के साथी

Wednesday, April 7, 2021

1068- रोटी

 अंजू खरबंदा 

रोटी -1

 

अक्सर जल जाती है मेंरे हिस्से की रोटी 

सबको गर्म गर्म खिलाने की चाहत में 

अपनी बारी आते आते तक


शुरू
 कर देती हूँ समेटा समेटी 

इस चक्कर में तवे पर पड़ी 

मेंरे हिस्से की रोटी जल जाती है  अक्सर! 

 

********

रोटी-2 

 

तरसती हूँ गर्म रोटी को

सबको खिलाते खिलाते

आखिरी नम्बर आते आते

ठंडी हो जाती है 

मेंरे हिस्से की रोटी! 

 

मायके जाने पर 

भाभी खिलाती है 

अपने हाथों से बनाकर

गर्म गर्म रोटी 

उनको भी पता है 

बिन माँ की बेटी

गर्म रोटी में ढूँढती है 

माँ का प्यार! 

 

**********

रोटी -3

 

चन्दा मामा गोल गोल

मम्मी की रोटी गोल गोल

बचपन में पढ़ी ये कविता

अक्सर याद आती है 

पर मुझसे नहीं बनती गोल रोटी !

मुझे रोटी बनाना सिखाने से 

पहले ही माँ चली गईं! 

-0-

अंजू खरबंदा ,दिल्ली

25 comments:

  1. बहुत सुंदर भावपूर्ण कविताएँ। बधाई अंजू जी।

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    1. नमस्कार आदरणीय! आपके शब्द मेरे लिये अनमोल है । दिल से शुक्रिया

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  2. बहुत भावुक और मार्मिक कविता. बधाई अंजू जी.

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    1. ह्रदय तल से आभार ❤

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  3. बहुत सुन्दर सृजन

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया जी

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  4. बहुत ही भावपूर्ण सृजन।
    हार्दिक बधाई अंजू जी

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  5. बहुत सुंदर, अंजु जी आपको बधाई!

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  6. बहुत भावपूर्ण और मर्मस्पर्शी कविताएँ।बधाई अंजू जी।

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  7. प्रिय अंजू , रोटी पर तुम्हारी तीनों मर्मस्पर्शी कविताएँ हर आम लड़की के जीवन का प्रतिनिधित्व कर रही हैं । खूब बधाई ।

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    1. दिल से शुक्रिया प्रिय दी❤

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  8. संवेदनशील और मार्मिक रचनाएं, हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
    ---परमजीत कौर'रीत'

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    1. अनमोल स्नेह के लिये ह्रदय तल से आभार

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    2. अनमोल स्नेह के लिये स्नेहिल आभार 🌹🌹

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  9. अंजु जी सुंदर भावपूर्ण कविता है हार्दिक बधाई।

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  10. मर्मस्पर्शी कवितायें, अंजू जी

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  11. सुन्दर प्रस्तुति

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  12. बहुत मर्मस्पर्शी और सहज रचना है, बहुत बधाई...|

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  13. सचमुच कितनी सहज अभिव्यक्ति।
    बधाई

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  14. बहुत भावपूर्ण सुंदर रचनाएँ...हार्दिक बधाई।

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  15. बेहद भावपूर्ण... हार्दिक बधाई अंजू जी।

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  16. मन को भिगोती 'रोटी'आपकी माँ और भाभी माँ के लिए प्यार और आदर जगा गई। मर्म छूती रचनाएँ। बधाई अंजू जी।

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