पथ के साथी

Friday, February 14, 2020

956-यादों-सा बिखरके


पूनम सैनी

यादों-सा बिखरके मुझसे
वो कही लम्हों-सा सँवर रहे है
और खुद को सँभालते,देखो
हम तिल-तिल बिखर रहे है। 

खाली किताब पर आखर 
बस दो ही लिखे हमने
कोई कहे उनसे,हम तो
धीमे से निखर रहे है

म की महफ़िल में मेरी
नाव डूब ही तो जाती
पर हौसलों के मेरे सदा
ऊँचे ही शिखर रहे हैं।
-0-

8 comments:

  1. मनभावन कविता पूनम जी, आपको बधाई!

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  2. पूनम जी खूब लिखा है -"और खुद को संभालते देखो ,हम तिल तिल बिखर रहे हैं" हार्दिक बधाई |

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  3. सुन्दर सृजन... हार्दिक बधाई पूनम जी !

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  4. भावपूर्ण सुंदर कविता
    बधाई पूनम जी

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  5. भावपूर्ण रचना... बधाई पूनम जी।

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  6. हृदय से शुक्रिया आप सभी का।बहुत बहुत धन्यवाद गुरु जी।🙏

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  7. सुंदर रचना।बधाई

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  8. भावपूर्ण कविता के लिए बहुत बधाई...।

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