रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
हारना नहीं
ये हसीन ज़िन्दगी,
स्वार्थी के लिए
कभी वारना नहीं।
नहीं जानते-
है तुझमें उजाला
हर पोर में
भरा सिन्धु बावरा ।
डूबने देना,
जो हैं छल से भरे,
दिखाते दया
उन्हें तारना नहीं ।
हारोगे तुम
हम हार जाएँगे
यूँ कभी नहीं
उस पार जाएँगे ।
काम बहुत
अभी करने हमें
घाव बहुत
रोज़ भरने हमें
नम हों आँखें
उड़ते ही जाना है
मिलके चलें
भले राह कँटीली
और हठीली
कठिन है डगर
आओ बसाएँ
उजियारों से भर
इक नया नगर ।
-0-
हर पग नये उत्साह में भरा हो
ReplyDeleteबहुत खूबसूरत भाव हिमांशु भैया! बेहद भावपूर्ण, अर्थपूर्ण, प्रेरणात्मक चोका !
ReplyDelete~सादर!!!
बहुत ही सार्थक चोका,आभार.
ReplyDeleteहिमांशु भाई,
Deleteदिल छू गया अर्थपूर्ण चोका!
"काम बहुत
अभी करने हमें
घाव बहुत
रोज़ भरने हमें
नम हों आँखें
तेरी भीगी हों पाँखें
उड़ते ही जाना है!"
इतना भावों से भरा चोका पढ़ा, दिल के संवेदनशील तारों को झनझना गया !
हार्दिक आभार !
डॉ सरस्वती माथुर
संवेदनशील मन से उभरे भावों से उछलता ये चोका दिल को छू गया ।
Deleteशुरू से लेकर आखिर तक हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता हर शब्द ।
मैं तो बस इनता ही कहूँगी ..........
नहीं रुकेंगे
जब तक है दम
उड़े चलेंगे
राह कँटीली
चरण चुभे शूल
बनेंगे फूल
हरदीप
उत्साह वर्धक बहुत सुन्दर चोका।
ReplyDeleteबहुत-२ आभार।
Bahut bhavpurn,sanjokar rakhne vaale bhaav hain ye ,bahut saari shubkamnaye...
ReplyDeleteआओ बसाएँ
ReplyDeleteउजियारों से भर
इक नया नगर.
सुंदर पंक्तियाँ ,आज इसी हौसले की जरूरत है .
बधाई .
बहुत उत्साहवर्द्धक पंक्तियाँ हैं...निराशा के अँधेरे में मानो आशा का संचार करती...| इस प्रेरणादायक रचना को पढ़वाने के लिए आभार और इसकी सार्थकता के लिए हार्दिक बधाई...|
ReplyDeleteप्रियंका
जीवन में उत्साह का संचार करती और सन्देश देती रचना.
ReplyDeleteकाम बहुत
अभी करने हमें
घाव बहुत
रोज़ भरने हमें
नम हों आँखें
उड़ते ही जाना है
भाव और भावनाप्रधान चोका के लिए बधाई.
yhi jeevn ki vastvikta bhi hai harne se achha hai jeet ke liye raste khojna utsahvardhak kavita hai.
ReplyDelete