पथ के साथी

Monday, January 3, 2022

1175- तेरे अधर के सुर मिलें

 रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'


25 comments:

  1. आहा... इतनी सुंदर कविता.. इतना सुंदर भाव.... वास्तव में सर.... इस काव्य स्रोत में मन बह गया.... बधाई सर 🌹🌹🌹🙏

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  2. बहुत सुंदर,अन्तस् को रससिक्त करती रचना हेतु आपकी लेखनी को नमन।आपको हार्दिक बधाई।

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  3. अँजुरी भर न पी सके हम
    कितनी बड़ी यह त्रासदी...

    - बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति!
    हार्दिक बधाई! 🌹

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  4. बहुत सुन्दर भाव भैया
    सादर
    रचना

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  5. बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति। नये वर्ष में पहली बेहतरीन कविता की हार्दिक बधाई।

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  6. आदरणीय सर, सुंदर भाव पूर्ण कविता के सृजन हेतु हार्दिक बधाई।

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  7. शब्दों और भावों का सुन्दर संगम , अप्रतिम रचना , बधाई भैया

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  8. हृदय की सम्पूर्ण गहराई से आप सबका आत्मीय आभार।

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  9. बहुत ही अनुपम, सरस रचना।
    हार्दिक बधाई गुरुवर को।

    सादर प्रणाम 🙏🏻

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  10. बहुत ही सुंदर कविता। मन छूती ।

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  11. बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ ।

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  12. बहुत सुंदर 👌🙏👌

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  13. बहुत सुंदर भाव।बधाई भैया।

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  14. बहुत उम्दा कविता 👌

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  15. आप सभी को हृदयतल से बधाई।

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  16. हृदय से निकले शब्द बहुत कुछ कह जाते हैं,
    अंत में अपने ही केवल याद रह जाते हैं | एक सच्ची अनुभूति ! बहुत सुंदर -श्याम हिन्दी चेतना

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  17. बहुत सुंदर सरस भावाभिव्यक्ति...हार्दिक बधाई।

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  18. भाई काम्बोज जी की कविता काव्य रस धार बहाती कविता है आनंद आया पढ़कर | हार्दिक बधाई |

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  19. एक से बढ़कर एक रचना ......
    तेरे अधर के सुर मिले ....
    कह सके ना जो उम्र भर ...
    अँजुरी भर ना पी सके हम ...
    बेहद सुंदर .....

    गुरुवर की लेखनी को नमन
    हार्दिक शुभकामनाएँ

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  20. बहुत सुंदर रचनाएँ, धन्यवाद आदरणीय!

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  21. बहुत ही सुन्दर भाव।गुरु जी की सभी रचनाएंँ मन मोहने वाली है।आपकी रचनाएं पढ़ के सदैव मन को संतुष्टि की ही अनुभूति होती है।बहुत प्यारे भाव।💐

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  22. भावपूर्ण एवं मनोहारी रचना के लिए बधाई आपको | नव वर्ष मंगलमय हो

    शशि पाधा

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  23. बहुत ख़ूबसूरत रचनाएँ. मरुभूमि की प्यास मेरी... कितनी बड़ी त्रासदी. इस रचना के भाव मानो सीधे आकर मन में चुभ गए. कितना कुछ रह जाता है कहना, वक़्त हमें चुप करा देता है. नव वर्ष पर भावपूर्ण रचनाओं के लिए बधाई काम्बोज भैया.

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  24. अनुपम भावों का संगम ...
    सादर वन्दन 🙏🙏

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