पथ के साथी

Thursday, December 16, 2021

1166

 1-सपना 

भीकम सिंह 

 


ना मैं साहिर
 

ना इमरोज़ 

पर ढूँढता हूँ 

हर रोज 

ख्वाबों में 

ख्यालों में 

अमृता  -

उसका सागर 

जहाँ वह

डूबने की हद

पार कर गई 

 

प्रेम के शब्द 

और

उनकी खुशबू 

मर्यादा के अर्थों को 

देकर

नई जुस्तजू

पुराने-से 

पड़ गए 

रिश्तों में 

नये आयाम 

धर गई 

 

मैं 

आसक्ति को ओढ़े 

सोच रहा था 

तट पर बैठे 

तभी एक

उच्छृंखल-सी लहर

पहने हुए 

दोपहर 

टूट कर गिरी 

और

तर कर गई 

-0-

2-अलसाई सुबह

 अंजू खरबंदा



आज का दिन

कुछ आलस से भरा है

आलस थोड़ा तन का

आलस थोड़ा मन का

जिंदगी के चलते रहेंगे लफड़े ।

 

देह चाहती आज आराम

जी नही करूँ कुछ काम

अलसाई-सी सुबह

पड़ी हूँ निष्प्राण

बिस्तर पर आलस से जकड़े ।

 

आज अच्छा लग रहा है

बिखरा घर

फैले कंबल

सलवटों से भरी चादर

कुरसी पर रखे बिन तह किए कपड़े ।

 

टेबल पर रखा चाय का कप

खुला अखबार

नि:शब्द डायरी का पन्ना

मुस्कुराता हुआ पेन

अंजुम त्याग दिए आज सारे पचड़े 

-0-

13 comments:

  1. ताज़गी का अहसास करातीं दोनों कविताएँ बहुत सुंदर। हार्दिक बधाई भीकम सिंह जी एवं अंजू जी।

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  2. दोनों रचनाएँ बेहद सुंदर। रचनाकार द्वय को बहुत-बहुत बधाई।

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  3. अलग अलग भाव बोध की दो कविताएँ,एक प्रेम के कोमल अहसास से भरी और एक अलसाए दिन की बेतरतीबी में सुकून ढूँढती कविता।डॉ.भीकम सिंह जी एवं अंजू खरबंदा को बहुत बहुत बधाई।

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  4. आलस में ताजगी की बानगी, सुन्दर कविता, अंजू खरबंदा जी को हार्दिक शुभकामनाएँ ।

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  5. उम्दा रचनाओं के लिए दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई।

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  6. अति उत्तम सृजन 🌹🙏😊

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  7. आप दोनों रचनाकारों को असीम बधाई 🌹🌹🌹🙏

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  8. मेरी कविता प्रकाशित करने के लिए सहज साहित्य का हार्दिक धन्यवाद और पसन्द करने के लिए आप सभी का हार्दिक आभार ।

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  9. भीकम जी एवं अंजू जी सुंदर सृजन के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें

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  10. दोनों कविताएँ बहुत ही सुन्दर, भावपूर्ण।
    आदरणीय भीकम सिंह जी को एवं अंजू जी को हार्दिक बधाई।

    सादर 🙏🏻

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  11. भीकम जी की 'सपना' कविता और अंजु जी की 'अलसाई सुबह' कविता बहुत सुन्दर सृजन है |आप दोनो रचनाकारों को हार्दिक बधाई |

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  12. विभिन्न भाव-बोध प्रकट करती रचनाएं। रचनाकारों को हार्दिक बधाई।

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  13. दोनों रचनाएँ ताज़गी लिए।
    भीकम सिंह जी और अंजु जी को बधाई।

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