पथ के साथी

Tuesday, January 26, 2021

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गुंजन अग्रवाल 

 1

हो न कठपुतली न केवल वोट वाला यन्त्र हो।

आदमी हो आदमी सद्भाव इसका मन्त्र हो।

गूंज वन्देमातरं की  गूँजती हरपल रहे-

तब सफल सच मायनों में ये दिवस गणतंत्र हो।

2

अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन इतना ध्यान रखो।

भारत माँ की आन- बान और सबसे ऊपर शान रखो।

तू- तू मैं- मैं हाथापाई आपस में कर लो जितना-

भारत मे गर रहना तुमको संविधान का मान रखो।

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18 comments:

  1. सहज साहित्य में स्थान देने हेतु सादर आभार भैया 🙏🙏

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  2. गुंजन जी को सुंदर सृजन के लिए बधाई।

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    1. हार्दिक धन्यवाद सविता जी😊 गणतंत्र दिवस की आपको हार्दिक शुभकामनाएं💐🇮🇳🙏🇮🇳💐

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  3. बेहतरीन मुक्तक,गुंजन जी को बधाई

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    1. बहुत बहुत आभार आदरणीय🙏🇮🇳🙏

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  4. अद्भुत राष्ट्रप्रेम के मुक्तक ।। जय हिंद ।। वंदेमातरम

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    1. सादर आभार आदरणीय राघव जी 🙏🇮🇳🙏

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  5. राष्ट्रप्रेम दर्शाते उत्तम मुक्तक। बधाई गुंजन जी।

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    1. बहुत बहुत आभार आदरणीया🙏🙏

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  6. बहुत सुंदर सृजन, हार्दिक बधाई।

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    1. सादर आभार आदरणीया 🙏

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  7. सुंदर सृजन

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    1. सादर आभार आदरणीय
      🙏

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  8. बहुत सुन्दर मुक्तक, बधाई गुंजन जी.

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    1. बहुत शुक्रिया आपका आ.🙏

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  9. सुंदर सृजन। बधाई गुंजन जी।

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    1. हृदय से आभार आ.🙏😊🙏

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