ज्योत्स्ना प्रदीप
पेण्टिंग:ज्योत्स्ना प्रदीप की माताश्री विमल जी |
प्रेम में डूबी मीरा
का,दर्द मतवाला दे दो ।
सुधा समझ जिसे पी
लिया,विष का वो प्याला दे दो ।
बचपन की हल्की धूप में ,
लिये कान्हा संग फेरे,
पावन सुख की आस लिये,
मन से हट गए अँधेरे,
उसी महाज्योति का बस थोड़ा -सा उजाला दे दो।
उसी महाज्योति का बस थोड़ा -सा उजाला दे दो।
प्रेम में
डूबी मीरा का,दर्द मतवाला दे दो ।
मीरा भटकी यहाँ -वहाँ,
मीरा भटकी यहाँ -वहाँ,
जाने छिपा कहाँ प्रियतम?
चित्तौड़,मेवाड़ के मोड़ ,
द्वारका या फिर वृन्दावन !!
उन्ही भटकते पाँवों का, सिर्फ़ एक छाला दे दो ।
प्रेम में डूबी मीरा का,दर्द मतवाला दे दो ।
मुग्धा के नयनों में प्रीत का
भरा हुआ था सागर,
पुजारिन के नेह ने ,
विषधर मे देखा वंशीधर ।
उस जलधि की लहरों का बस एक उछाला दे दो।
प्रेम में डूबी मीरा
का,दर्द मतवाला दे दो ।
मीरा को मिला मोहन ,
अपने मोह का क्या होगा?
महामिलन की आस लिये,
इस विछोह का क्या होगा ?
मन में लय ,तानें नही, मुझे वंशीवाला दे दो
।
प्रेम में डूबी मीरा
का,दर्द मतवाला दे दो ।
पूर्ण समर्पित प्रेम की बहुत बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ...हार्दिक शुभ कामनाएँ ...ज्योत्स्ना जी ... :)
ReplyDeleteहैप्पी होली .... :)
सादर
ज्योत्स्ना
प्रेम मद छाके, पग परत कहाँ के कहाँ
ReplyDeleteसुन्दर अभिव्यक्ति।
बहुत ही मनमोहक, पावन, सुन्दर रचना !
ReplyDelete~प्यार में डूबा हर दिल...एक यही दर्द माँगता है,
बंसी की सुरीली धुन में...अपनी तान तलाशता है ..~
आपको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनाएँ !!! :-)
~सादर
अनिता ललित
mujhe aapki yeh rachna aur aapki mataji ki painting bahut hi prabhaavshaali lage !!!!dono hi badhai ke patra hai :)
ReplyDeleteकृष्ण प्रेम-भक्ति में सरोबार रचना .....शुभकामनाएं ज्योत्स्ना जी...
ReplyDeleteभक्ति रस में डूबी खूबसूरत पंक्तियों के लिए हार्दिक बधाई...|
ReplyDeletehimanshu ji ne is rachna ko sthan dekar tatha aap sabhi ne iski pransha kar jo mera utsah badhaya hai uske liye dil se aabhar
ReplyDeletewaah jyotsna ji .....bahut khoob .....iss kavita mein meera ki bhakti ne mann moh liya ...painting ka bhi jawaab nahi ......
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