पथ के साथी

Thursday, December 28, 2017

784

रामेश्वर  काम्बोज 'हिमांशु'
1
पलकों पर तुम रात दिन,उर में हर पल वास।
रोम-रोम में प्यार का,होता है आभास।।
2
झरने-सी तेरी हँसी,तिरती हरदम पास।
जीवन के पल चार में,तुम ही मेरी प्यास।।
-0-
चौपाई

आँसू 
ज्योत्स्ना प्रदीप


आँसू की जननी है  पीड़ा
करती है पर  कैसी  क्रीड़ा ।।
जनम दिया पर तज देती है 
आँखों के पथ  रज देती हैं ।।

आँसू का बस दोष बता दो 
रहे जहाँ ये वही  पता  दो ।।
आँखों से ये बह  जाते हैं
मौन व्यथा पर कह जाते हैं ।।

आँसू  जल का जीवन न्यारा
नयनों  चमके  मानों तारा ।।
ये भी जीवन के बलिदानी 
दूजों की पीड़ा  के  मानी  ।।
-0-

2-दिव्य - बिंदु 

नभ ,गिरि ,कानन तुम वसुधा हो
जनम - जनम की तीव्र क्षुधा हो ।।
रजत- चाँद हो तपस स्वर्ण से 
नील कमल के सरल पर्ण से ।।
  
तुम हो बादल  शांत  -सिंधु से 
पार न कुछ हो दिव्य - बिंदु से ।।
नयन अमिय को तुम  छलकाते
करुणा पाकर   कर  जुड़ जाते ।।
  
शिशु की कोमल किलकारी हो
सुरभित कुसुमों की क्यारी हो||
जानें अब किस देश बसे हो
किस नाते में  हमें  कसे  हो ।।
  
जग में जितना रहता छल है
इन आँखों से गिरता  जल है ।।
मन ना लगता है इस जग में
मन में रख लो या फिर दृग  में ||

-0-

11 comments:

  1. बहुत बहुत सुंदर दोहे और चौपाई सादर नमन आपकी लेखनी को आदरणीय काम्बोज भैया आदरणीया ज्योत्स्ना जी

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  2. अति सुंदर... भावों से सराबोर दोहे सर... बधाई आपको

    ज्योत्सना जी की चौपाइयां बहुत सुंदर हैं और छंद भी बहुत अच्छे

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  3. बहुत सुंदर दोहे , आदरणीय भैया जी .., ज्योत्स्ना जी बहुत सुंदर सृजन ।
    आप दोनों को हार्दिक बधाई ।

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  4. हिमांशु भाई के भावपूर्ण दोहे अतिसुन्दर । बधाई भाई जी ।ज्योत्सना प्रदीप जी की चौपाई छंद सुन्दर । काव्यात्मक सौंदर्य के लिये भैया जी व ज्योत्सना जी को अनेक बधाई ।

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  5. भावपूर्ण दोहे; रुचिकर चौपाइयां |कम्बोज जी और ज्योत्सना जी को नमन | सु. व.

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  6. बहुत सुन्दर भावपूर्ण दोहे भैया जी !
    सुन्दर चौपाइयाँ ज्योत्स्ना जी ..दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई ..सादर नमन !!

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  7. सुन्दर रचनाएँ

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  8. अति सुंदर भावपूर्ण दोहे और चौपाइयाँ...आ० काम्बोज जी तथा ज्योत्स्ना जी हार्दिक बधाई।

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  9. भैया जी अति सुन्दर दोहे !

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  10. भैया जी का दिल से आभार मेरी रचनाओं को यहाँ स्थान देने के लिए साथ ही आप सभी का भी बहुत - बहुत शुक्रिया मेरा मनोबल बढानें के लिए !

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  11. बहुत मनोहारी रचनाएँ हैं | आप दोनों को बहुत बधाई...|

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