पथ के साथी

Monday, January 22, 2018

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मुकद्दमा
-डॉ. कविता भट्ट 

अरे साहेब! 
एक मुकद्दमा तो उस शहर पर भी बनता है
जो हत्यारा है–
 सरसों में प्रेमी आँख-मिचौलियों का 
और उस उस मोबाइल को भी घेरना है कटघरे में  
जो लुटेरा है–
 सरसों सी लिपटती हँसी-ठिठोलियों का 
 हाँ- 
उस एयर कंडीशन की भी रिपोर्ट लिखवानी है
जो अपहरणकर्त्ता है- 
गीत गाती पनिहारन सहेलियों का
और उस मोबाइल को भी सीखचों में धकेलना है
जो डकैत है- 
फुसफुसाते होंठों-चुम्बन-अठखेलियों का 
उस विकास को भी थाने में कुछ घंटे तो बिठाना है
जिसने गला घोंटा
बासंती गेहूं-जौ-सरसों की बालियों का;
लेकिन इनका वकील खुद ही रिश्वत ले बैठा है
फीस इनसे लेता है
और पैरोकार है शहर की गलियों का
ओ साहेब! 
आपकी अदालत में पेशी है इन सबकी 
कुछ तो हिसाब दो -
उन मारी गयी मीठी मटर की फलियों का 
                   _0_

18 comments:

  1. बहुत अच्छा मुकदमा कविताजी । वास्तव में हम विकास केनाम पर प्रकृति से कितने दूर हो गए हैं।

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  2. नए तेवर में रची बहुत सुंदर एवं व्यंजनात्मक रचना। हार्दिक बधाई कविता जी । समय पर पोस्ट करने के लिए बहन ज्योत्स्ना शर्मा जी का भी आभार।
    काम्बोज

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    1. हार्दिक आभार , महोदय

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  3. वाह, कविता जी अलग ही अंदाज़ है कहन का, अच्छा व्यंग्य भी। बधाई।

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  4. सुन्दर ,सामयिक सृजन !
    कविता जी को बहुत बधाई !
    इस साहित्य-साधना का मुझे भी एक उपकरण बनाने के लिए
    माँ शारदे को बारम्बार नमन करती हूँ :) नमन आ.काम्बोज भाई जी को भी !

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    1. हार्दिक आभार, आदरणीया

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  5. आज के समय पर बहुत सुन्दर रचना लिखी है कविता जी...
    बहुत-बहुत बधाई आपको !

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    1. हार्दिक आभार, सखी

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  6. सखी ज्योत्स्ना शर्मा जी को भी हार्दिक बधाई !

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  7. लाजवाब कहन है कविता जी। बहुत बधाई

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  8. लाजवाब कहन है कविता जी बहुत बधाई।

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    1. हार्दिक आभार, आपका

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  9. वाह ! एक अलग अंदाज की रचना पढ़ने का अवसर मिला ..हृदय से बधाई कविता जी ।

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  10. एक अलग अंदाज में उत्कृष्ट सृजन ..हार्दिक बधाई कविता जी ।

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    1. हार्दिक आभार, सखी।

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  11. बहुत सुन्दर रचना.

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  12. बहुत सुन्दर रचना। इसके लिए आपका आभार

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    1. हार्दिक आभार, महोदय

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