पथ के साथी

Monday, July 15, 2019

915



1-प्रीति अग्रवाल
1-भोर

भोर हो गई
चलो स्नान कर,
सूर्य देव को 
अर्घ चढ़ाएँ,

डाल- डाल फिर
चहक- चहक,
नव दिन का 
मंगल गीत सुनाएँ ।

-0-

2-क्या पता था

मिज़ाज  कुछ
सुस्त था,
तन्हाई का
आलम भी,

पिघलती रेत ने
ऐसे गुदगुदाया,
कि मुस्कुराहट 
आ ही गई ।
-0-
(चित्रांकन: प्रीति अग्रवाल)
ई-मेल- agl.preeti22@gmail.com

-0-
दोहे
2-अनिता मण्डा
1
खाली पाती मेघ की, धरा रही है बाँच।
तृष्णा पल-पल बढ़ रही, सुलगी भीतर आँच।।
 2
बदरा नभ का पावणां, रखे धरा से हेत।
भूले जब से राह वो, सूख गए हैं खेत।।
3
जंगल, नदिया, बावड़ी, धूप रही है चूस।
वापस कुछ देते नहीं, मेघ हुए कंजूस।।
-0-
3-मंजूषा मन
1
मेरे सब सुख आपके, दुख सब मेरे नाम।
प्रभु जी सुनिए यह अरज, कीजै मेरा काम।
2
मुझमें  थोड़ा तू बसातुझमें  मेरा वास।
जीवन की खुशियाँ यही, मन क्यों रहे उदास।।

36 comments:

  1. चित्र और रचनाएँ दोनों बहुत ख़ूबसूरत...हार्दिक बधाई प्रीति जी।
    बहुत सुंदर दोहे...अनीता जी, मंजूषा जी बहुत बधाई।

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    1. कृष्णा जी आपके स्नेह के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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    2. आभार आपका कृष्णा जी

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  2. अच्छी रचनाएँ , सभी को बधाई । चित्र अनुसार कविता लिखी गयी है - सुंदर प्रस्तुति ।

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    1. रमेशजी हौसला बढ़ाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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    3. आभार आपका रमेश जी

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  3. This comment has been removed by the author.

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (16-07-2019) को "बड़े होने का बहाना हर किसी के पास है" (चर्चा अंक- 3398) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (16-07-2019) को "बड़े होने का बहाना हर किसी के पास है" (चर्चा अंक- 3398) पर भी होगी।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. अच्छी रचनायें प्रीति जी और चित्र भी बहुत सुंदर।

    अनिता मेघों पर दोहे बहुत भावपूर्ण। मन जी के दोहे भी सुंदर।

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    1. धन्यवाद और आभार भावना जी।

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    2. हार्दिक आभार भावना जी

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  7. चित्र के अनुसार प्रकृति में नहाई-धोई सी ख़ूबसूरत कविताएँ। बधाई प्रीति जी।सहज साहित्य में आपका स्वागत हाँ।
    मेघों की बेवफ़ाई का सुंदर वर्णन।बधाई अनिता जी।
    मुझमें थोडा तू बसा, तुझमें मेरा वास। बहुत सुंदर मंजूषा जी बधाई।

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    1. सुदर्शन जी आप के शब्द मिशरी की तरह कानों में घुल रहे हैं। बहुत बहुत धन्यवाद और आभार!

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    2. सादर आभार आपका सुदर्शन दीदी

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  8. प्रीति जी, मंजूषा जी को बधाई प्यारी रचनाओं के लिए।
    उत्साहवर्धन के लिए आभारी हूँ

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    1. धन्यवाद और आभार अनीता जी!!

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    2. आभार अनिता जी

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  9. प्रीति जी बहुत बढ़िया कवितायें चित्र भी सुंदर हैं हार्दिक बधाई |

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    1. सविता जी यूं ही स्नेह देती रहिये, सफर नया है!!

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  10. अनिता जी और मंजूषा जी सुंदर दोहे सृजन के लिए हार्दिक बधाई |

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    1. हार्दिक आभार सविता जी

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  11. प्रीति जी,अनिता जी और मंजूषा जी आप सभी को सुन्दर रचनाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई ।

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    1. सुरंगमा जी आपके प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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    2. बहुत बहुत आभार सुरँगमा जी

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  12. सुंदर रचना..

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    1. अनीता जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

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    2. हार्दिक आभार अनिता जी

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  13. दोहे प्रकाशित करने के लिए हार्दिक आभार आदरणीय रामेश्वर सर

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  14. सुंदर छोटी कविताएँ प्रीति जी

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  15. अति सुंदर दोहे अनिता जी... बधाई

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  16. मनमोहक कविताएँ प्रीति जी!
    बहुत ख़ूब अनिता जी एवं मंजूषा जी! सभी दोहे बहुत बढ़िया !

    ~सादर
    अनिता ललित

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  17. सभी रचनाएँ बहुत सुन्दर और भावपूर्ण. प्रीति जी, अनिता जी और मंजूषा जी को बधाई.

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    1. जेन्नी जी प्रोत्साहन के लिए शुक्रिया!

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