पथ के साथी

Thursday, April 29, 2021

1097-बेटियाँ शीतल हवाएँ

 कुँअर बेचैन










 1 जुलाई 1942को ग्राम -डमरी ( मुरादाबाद ) में जन्मे हिन्दी गीत -ग़ज़ल के पुरोधा कुँअर बेचैन( कुँवर बहादुर सक्सेना) नहीं रहे। मेरे सम्पादन में  प्रकाशित पुस्तकों की शृंखला  डीसेण्ट  हिन्दी रीडर में आपकी कविता ‘बेटियाँ शीतल हवाएँ’ बहुत चर्चित रही। यह कविता विगत बीस वर्षों से कक्षा 8 के बहुत से  विद्यार्थी पढ़ चुके हैं। सहज साहित्य -परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि !

रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'











16 comments:

  1. कुँवर बेचैन जी से आपके साथ ही पहली बार मिलना हुआ था मेरा। कक्षा 8 में उनकी जो कविता पढाई जाती है, बोटियों पर कितना सुन्दर लिखा है। बेचैन जी को सुनना बहुत अद्भुत अनुभव है। इस कोरोना ने न जाने कितने साहित्यकारों को हमसे छीन लिया। हार्दिक श्रद्धांजलि।

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  2. ओह बहुत दुःखद । हिंदी साहित्य का एक सितारा टूट गया।

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  3. बहुत दुःखद। विनम्र श्रद्धांजलि।

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  4. सुंदर कविता,विख्यात रचनाकार को नमन।
    अपूरणीय क्षति, विनम्र श्रद्धांजलि।

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  5. हिन्दी के गजल सम्राट श्री कुंवर वैचैने जी से मेरी मुलाक़ात २००७ में प्रथम बार हुयी थी |इसके बाद अंतिम बार २०१२ में हिंदी चेतना के मंच पर उनकी गजलें और गीत सुने थे |उनकी दी गयी भेंट गजलों की कैसेट मैं बार -बार सुनता हूँ | आपके चेहरे पर मुस्कान और जिस नम्रता से आप मिलते थे |कभी भी भूल नहीं पाउँगा| बगवान उनकी आत्मा को परम शान्ति दे | श्याम त्रिपाठी हिन्दी चेतना

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  6. विनम्र श्रद्धांजलि

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  7. दुःखद, विनम्र श्रद्धांजलि!

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  8. विनम्र श्रद्धांजलि!

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  9. दुःखद समाचार। प्रभु दिवंगत आत्मा को शान्ति प्रदान करें। कविता वाक़ई बहुत सुंदर है।भावभीनी श्रद्धांजलि।

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  10. बहुत ही दुखद है भगवान आपकी आत्मा को शांति दे।
    सादर
    रचना श्रीवास्तव

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  11. सादर नमन, विनम्र श्रद्धांजलि।

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  12. विनम्र श्रद्धांजलि

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  13. साहित्य जगत को एक गहरा आघात लगा है।

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  14. बहुत दुःखद।
    ॐ शान्ति🙏

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  15. गीतों के "कुँवर" चले गए, स्वरों का सिंहासन खाली हो गया। उनके गीत, मधुर कंठ, सहज स्वभाव और विनम्रता हिन्दी साहित्य में अमर रहेंगे। नए रूपक और बिंबों से अपने गीतों में जीवन को बयान करने की उनकी शैली, आने वाली पीढ़ियों को बहुत कुछ सिखाती रहेगी। उनके जाने का गहरा दुख है। उनको सादर नमन!

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