पथ के साथी

Thursday, April 29, 2021

1096-तो बस तुमको गाता हूँ

 डॉ.आदित्य शुक्ल

 

मैं तो बस तुमको गाता हूँ

केवल तुम्हें रिझाने को।


लोग भले उसे मेरी कविता

गीत, कहानी कहते हैं। 

शब्द-शब्द में, छंद-छंद में,

बंध-बंध में नाम तेरा।

लोग भले ही उसको मेरी,

कृति सुहानी कहते हैं।।

 

नई कल्पनानई योजना,   

रूप नया,  शृंगार नया।

सृजन नया, संकल्प नया,

सिद्धान्त नया, स्वीकार नया।

रोज नए संबंध, नया-

 संसार गढ़ा,तुम्हें पाने को।

लोग भले ही सुन उसको,  

मुझको विज्ञानी कहते हैं ।1

 

मन मुखरित हो जाता मेरा

चिंतन में जब तुम आते हो।

मेरा योग न होता किंचित्, 

जो लिखना, तुम लिख जाते हो।

हर एक स्वर में, राग-राग में,

तुम गाते हो गाने को,

लोग भले ही उसको मेरी,

मधुरिम वाणी कहते हैं ।2

 

सबके आगे हाथ पसारूँ, 

इतना भी भाव नहीं है। 

तुमसे परे और कुछ सोचूँ,

मेरा यह स्वभाव नहीं है। 

स्वांग रचाता, मैं तेरा हूँ

तुमको यह बतलाने को।

लोग भले ही आपस में,

कुछ दबी जुबानी कहते हैं।3

 

तुम अनंत हो, तुम असीम हो,

जाऊँ मैं तुम पर बलिहारी।

मन में भाव अथाह लिये, 

मैं थाह नहीं पा सका तुम्हारी।

एक अबोध सा बोध लिये हूँ,

मन की व्यथा सुनाने को।

लोग भले ही देख उसे,

मुझे निभिमानी कहते हैं।4

-0-

डॉ.आदित्य शुक्ल- (बैंगलोर 094482 06113)

22 comments:

  1. डा. शुक्ल जी की रचना हृदय के भावों की पूंजी है | सरल शब्दों से गागर में सागर भर दिया है | इतनी नम्र भावना को देखकर बहुत कुछ सीखने को मिल गया | आपकी रचना बहुत ही सुंदर है | भगवान आपको इसी प्रकार लिखने की प्रेरणा देता रहे |श्याम हिन्दी चेतना

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    1. आदित्य शुक्ल29 April, 2021 12:07

      बहुत बहुत आभार आदरणीय।

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  2. बहुत सुंदर

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  3. तुम अनंत हो, तुम असीम हो,
    जाऊँ मैं तुम पर बलिहारी।
    मन में भाव अथाह लिये,
    मैं थाह नहीं पा सका तुम्हारी।
    एक अबोध सा बोध लिये हूँ,
    मन की व्यथा सुनाने को।
    लोग भले ही देख उसे,
    मुझे निरभिमानी कहते हैं/////
    वाह वाह👌👌👌 आदित्य जी, अनुरागी मन का प्रीत राग 👌👌👌
    पढ़कर सुबह सुहानी हो गयी! हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई🙏🙏 💐💐

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    1. आदित्य शुक्ल29 April, 2021 12:10

      इस मनभावन प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार रेणु जी।

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  4. सुंदरतम कविता

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    1. आदित्य शुक्ल29 April, 2021 12:12

      हार्दिक धन्यवाद महिमा जी।

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  5. वाह आदित्य जी एक एक शब्द में कितने भाव छिपे हैं सरल शब्दों में मन की बात को कविता के रूप में प्रस्तुत किया है बधाई स्वीकारें।

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    1. आदित्य शुक्ल29 April, 2021 12:16

      इस प्रतिक्रिया एवं प्रोत्साहन से अभिभूत हूँ। हार्दिक आभार सविता जी।

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    1. आदित्य शुक्ल29 April, 2021 12:18

      सादर आभार शिवम जी।

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  7. कितनी ही सहजता से बड़ी गहराई लिए आपने ये कविता रची है उतनी ही गहरी आपकी दृष्टि है- बधाई।

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    1. आदित्य शुक्ल29 April, 2021 12:20

      इसका रहस्य कविता के भाव में ही निहित है रमेश जी। सादर धन्यवाद।

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  8. बहुत ही सुन्दर भावों से सजी रचना।
    हार्दिक बधाई स्वीकारें।

    सहज साहित्य परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है आदरणीय।

    सादर-
    रश्मि विभा त्रिपाठी 'रिशू'

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    1. आदित्य शुक्ल29 April, 2021 12:22

      सादर आभार आपका रश्मि जी।

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  9. आदित्य शुक्ल29 April, 2021 12:21

    हार्दिक आभार आपका प्रीति जी।

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  10. गागर में सागर सी काव्यमयी मीठी कविता । बधाई ।

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  11. प्रेम में भीगी प्यारी, भावपूर्ण सुंदर कविता...
    आदित्य जी हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें

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  12. बहुत ख़ूबसूरत गहन अभिव्यक्ति...हार्दिक बधाई आदित्य जी।

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  13. सरल शब्दों में मन के गहन भावों की बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति। हार्दिक बधाई आपको।

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  14. बहुत सुन्दर रचना...हार्दिक बधाई आपको आदित्य जी।

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